पिछले एक दशक में अर्थव्यवस्था की हालत हुयी खराब : Congress

नयी दिल्ली: कांग्रेस ने लोकसभा में शुक्रवार को कहा कि पिछले एक दशक में सरकार ने हर क्षेत्र पर निजी कंपनियों को एकाधिकार देकर जहां एक तरफ देश में असमानता में बढोत्तरी करायी, वहीं दूसरी ओर इससे अर्थव्यस्था की हालत खराब हो गयी है।

कांग्रेस के दीपेन्द्र सिंह हुड्डा ने अनुदान की अनुपूरक मांगों पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार ने जिस प्रकार के आंकडे और विकास दर दर्शायी है उसकी विश्ववसनीयता पर ही सवाल खड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने अपने डेटा पर्याप्तता आकलन में हाल ही में सरकार के आंकड़ों को सी ग्रेड में डाल किया है। इससे साफ होता है कि सरकार किस प्रकार विकास दर के आंकड़े सामने रखती है। सरकार ने अपने हिसाब से अर्थव्यवस्था के आंकड़े दिये जिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की सरकार में विकास दर 8.1 प्रतिशत थी जो अब औसतन 5.75 प्रतिशत पहुंच गयी है।

श्री हुड्डा ने कहा कि 78 वर्ष में भारतीय मुद्रा सबसे निम्नतम स्तर पर पहुंची है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने बयान दिया कि रुपया इतना नहीं गिरा बल्कि डालर मजबूत हुआ है, जो हास्यास्पद है। उन्होंने कहा कि एशिया की बाकी सभी देशों की मुद्रा की तुलना में हमारा रुपया सबसे खराब स्थिति में है। देश में गरीबी और अमीरी के बीच खाई अधिक बड़ी है। देश के एक प्रतिशत सबसे अमीर के पास देश के चालीस प्रतिशत संपत्ति आयी है। गरीबी और अमीरी में सौ साल का रिकार्ड टूटा है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने राज्य सभा में बताया कि उसने सोलह लाख करोड़ का कर्ज पिछले दस साल में माफ किया गया है। सरकार हर क्षेत्र में निजी कंपनियों को एकाधिकार दे रही है। हमारे देश में दो कंपनियों के पास हवाई यात्रा का एकाधिकार है अगर वह दोनों कंपनियां जो चाहे किराया तय कर सकते हैं। इसी प्रकार संचार और मीडिया के क्षेत्र में भी दो कंपनियों का एकाधिकार है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में हर क्षेत्र में एकाधिकार रोकने का कानून है जिसके तहत किसी कंपनी का एक क्षेत्र में तीस प्रतिशत से अधिक शेयर नहीं हो सकता है लेकिन हमारे ऐसा कोई कानून नहीं है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि विनिर्माण और सेवा क्षेत्र छोड़कर लोग कृषि क्षेत्र में जा रहे है जो देश के लिए चिंता जनक है। उन्होंने कहा कि आज तक देश पर इतना कर्ज नहीं चढ़ा। राज्य और केंद्र पर कुल मिलाकर जीडीपी का 82 प्रतिशत कर्ज है। उन्होंने कहा कि देश में इतना प्रदूषण कभी नहीं हुआ ,जितना आपके शासन में है।

उन्होंने कहा कि रक्षा मामलों की स्थायी समिति ने रक्षा क्षेत्र में जीडीपी का तीन प्रतिशत खर्च करने की लगातार सिफारिश की है लेकिन सरकार इस पर 1.9 प्रतिशत खर्च कर रही है।

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