धान सीजन में पंजाब पर बिजली संकट की मार, पांच थर्मल यूनिट बंद होने से बढ़ा आर्थिक बोझ
पंजाब में धान की बुवाई के महत्वपूर्ण मौसम के दौरान बिजली संकट गहराता जा रहा है। राज्य की पांच थर्मल पावर यूनिटों के बंद होने के कारण बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे सरकार को बाहरी स्रोतों से महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ रही है। इस स्थिति ने न केवल बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है, बल्कि राज्य के वित्तीय संसाधनों पर भी अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।
धान की खेती पंजाब की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार मानी जाती है। इस समय बड़ी संख्या में किसान खेतों में धान की रोपाई और सिंचाई कार्यों में जुटे हुए हैं। ऐसे में बिजली की मांग सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है। किसानों को ट्यूबवेल चलाने के लिए लगातार बिजली की आवश्यकता होती है, लेकिन उत्पादन क्षमता में कमी के कारण बिजली आपूर्ति व्यवस्था चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कुछ थर्मल यूनिट मरम्मत और तकनीकी कारणों से बंद हैं, जबकि कुछ इकाइयों में रखरखाव का कार्य चल रहा है। इसके चलते राज्य को बिजली की कमी पूरी करने के लिए खुले बाजार से ऊंची कीमतों पर बिजली खरीदनी पड़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ते अंतर के कारण बिजली खरीद की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
सरकार ने दावा किया है कि किसानों को निर्धारित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। बिजली विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है और बंद पड़ी इकाइयों को जल्द चालू करने की दिशा में काम कर रहा है। साथ ही वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और अन्य राज्यों से अतिरिक्त बिजली प्राप्त करने के विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिजली संकट लंबे समय तक जारी रहता है तो इसका असर कृषि उत्पादन और राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता किसानों को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराना और ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना है, ताकि धान की बुवाई और सिंचाई कार्य प्रभावित न हों।




