दिल्ली साइबर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: ₹1.91 लाख की ऑनलाइन ठगी का खुलासा, जयपुर से दो आरोपी गिरफ्तार

 

नितिन जैन नई दिल्ली।

दिल्ली पुलिस की साइबर सेंट्रल यूनिट ने ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी के एक बड़े मामले का पर्दाफाश करते हुए राजस्थान के जयपुर से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

आरोपियों पर साइबर ठगी के जरिए लोगों के खातों से धनराशि निकालने और उसे विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से ठिकाने लगाने का आरोप है। पुलिस ने जांच के दौरान ₹1.91 लाख की ठगी से जुड़े वित्तीय लेनदेन का पता लगाया है।पुलिस के अनुसार, 23 अप्रैल 2026 को एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई कि उसके बैंक खाते से बिना अनुमति के पैसे निकाल लिए गए हैं।

शिकायतकर्ता ने बताया कि 22 अप्रैल को उसका मोबाइल फोन अचानक गर्म हो गया और उसकी स्क्रीन पूरी तरह काली पड़ गई। कुछ समय बाद फोन सामान्य हुआ तो उसे पता चला कि उसके खाते से ₹95,000 निकाल लिए गए हैं।अगले दिन एक और संदिग्ध लेनदेन के जरिए ₹96,000 की राशि भी खाते से ट्रांसफर कर दी गई। इस प्रकार कुल ₹1,91,000 की धोखाधड़ी सामने आई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर सेंट्रल थाना में ई-एफआईआर संख्या 00081/2026 दर्ज की गई और जांच शुरू की गई।जांच के लिए एएसआई संजय कुमार सिंह, हेड कांस्टेबल खेम सिंह और हेड कांस्टेबल अमित कुमार की विशेष टीम का गठन किया गया, जो इंस्पेक्टर योगराज दलाल और एसीपी ऑपरेशंस की निगरानी में कार्य कर रही थी।

तकनीकी और वित्तीय जांच के दौरान पुलिस ने धन के प्रवाह (मनी ट्रेल) का विश्लेषण किया। जांच में पता चला कि ठगी की राशि विभिन्न बैंक खातों में भेजी गई थी, जिनमें एक यस बैंक खाता रोहित कुमार बैरवा के नाम पर था।तकनीकी निगरानी और स्थानीय जांच के आधार पर पुलिस टीम जयपुर पहुंची और वहां से रोहित कुमार बैरवा तथा लोकेश महावर को गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में रोहित ने खुलासा किया कि वह अपने बैंक खाते साइबर ठगों को कमीशन के बदले उपलब्ध कराता था। वहीं, लोकेश महावर ने स्वीकार किया कि वह साइबर अपराधियों के लिए म्यूल बैंक अकाउंट की व्यवस्था करता था।जांच में सामने आया कि उसने करीब 30 बैंक खातों की व्यवस्था कर साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर कराने में मदद की थी।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अपराध में इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं। साथ ही लगभग 30 संदिग्ध म्यूल बैंक खातों की पहचान की गई है।जांच में यह भी सामने आया है कि साइबर अपराधी पीड़ितों के मोबाइल और बैंकिंग एप्लीकेशन तक अनधिकृत पहुंच बनाकर धोखाधड़ी को अंजाम देते थे।

दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों, अतिरिक्त बैंक खाताधारकों और पूरे वित्तीय नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है।

 

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