Books fair: ‘चलते रहो, चलते रहो, जिंदगी तो बस एक बहाना है, जिंदगी का नाम है खुद का आनंद लेना, कौन जाने आगे क्या होगा’ – कविता लेखन कार्यशाला में बच्चों द्वारा लिखी गई कविता

'Keep moving, keep moving, life is just an excuse, life is about enjoying yourself, who knows what will happen next' - poem written by children in the poetry writing workshop

गोमती पुस्तक महोत्सव के दूसरे दिन की शुरुआत शब्द संसार में आयोजित पहले सत्र ‘रोल प्ले: सीखें और अभिनय करें’ से हुई। शब्द संसार के मंच पर मुस्कान शर्मा ने बच्चों को विभिन्न प्रकार की भावनाओं को व्यक्त करना सिखाया। उन्होंने विभिन्न प्रकार की तालियों के माध्यम से बच्चों का ध्यान केंद्रित किया और ‘हाय, हैलो’ जैसे शब्दों के माध्यम से शब्दों और ध्वनियों के उतार-चढ़ाव के बारे में बच्चों को समझाया। इसके साथ ही बच्चों के साथ कई रोचक गतिविधियां भी कराई गईं। बच्चों को अभिनय के बारे में रोचक जानकारी दी गई।

कविता से गीत तक का सफर

शब्द संसार के मंच पर आयोजित दूसरे सत्र में चिन्मय त्रिपाठी और जोएल ने बच्चों को कविताओं का महत्व समझाया, उन्होंने बताया कि कविताएं सुनाने से न केवल हमारा बौद्धिक विकास होता है बल्कि सामाजिक विकास भी होता है। चिन्मय ने बच्चों को यह भी बताया कि हम कविताओं की लय और ताल को समझकर उन्हें कैसे गा सकते हैं। साथ ही उन्होंने बच्चों को दो पंक्तियां ‘चलते जाना, चलते जाना, जिंदगी तो है बहना’ दीं और बच्चों को अगली दो पंक्तियां जोड़ने के लिए दीं। बच्चों ने अपनी भावनाओं को कविता का रूप दिया और चिन्मय ने बच्चों द्वारा दी गई कविता की पंक्तियों ‘चलते जाना, चलते जाना, जिंदगी तो है बहाना, अपनी मस्ती में है जीना, आगे क्या हो किसने जाना’ को गीत के रूप में प्रस्तुत कर बच्चों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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