नीट विरोध प्रदर्शन मामले में उच्चतम न्यायालय का बड़ा फैसला
नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हुए छात्र विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में उच्चतम न्यायालय ने महत्वपूर्ण रुख अपनाते हुए जांच के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति के पुनर्गठन से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल किसी सदस्य को लेकर आशंका जताए जाने के आधार पर उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित समिति की निष्पक्षता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। अदालत ने कहा कि समिति न्यायालय की निगरानी में काम कर रही है और उसका उद्देश्य विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं की स्वतंत्र तथा निष्पक्ष जांच करना है।
उच्चतम न्यायालय ने अगस्त में पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया था। समिति की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। समिति को छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस ज्यादती, प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा तथा पुलिस और प्रदर्शनकारियों से जुड़े अन्य आरोपों की जांच करनी है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से समिति के एक सदस्य की स्वतंत्रता को लेकर आपत्ति जताई गई थी। हालांकि अदालत ने समिति को भंग करने या उसका पुनर्गठन करने की मांग स्वीकार नहीं की। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि समिति का काम घटनाओं की जांच करना, पीड़ितों की पहचान करना और अपनी सिफारिशें देना है।
अदालत ने समिति की शक्तियों की सीमा भी स्पष्ट की है। समिति स्वयं प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश नहीं दे सकती। आपराधिक जांच का आदेश देने का अधिकार न्यायालय के पास रहेगा।
इस मामले में अदालत पहले ही शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों से संबंधित कुछ प्राथमिकी को लेकर राहत दे चुकी है। अब जांच समिति की रिपोर्ट से विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं और कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़े तथ्यों को सामने आने की उम्मीद है।




