शी चिनफिंग की संभावित भारत यात्रा पर दुनिया की नजर
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की संभावित भारत यात्रा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजरें टिक गई हैं। नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान उनके भारत आने की संभावना जताई जा रही है। यदि यह यात्रा होती है, तो करीब सात वर्षों बाद शी चिनफिंग का भारत दौरा होगा। उनकी पिछली भारत यात्रा अक्टूबर 2019 में हुई थी।
शी चिनफिंग की संभावित यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत और चीन के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों के तनाव के बाद धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों पर गहरा असर पड़ा था। इसके बाद सीमा पर तनाव कम करने और सैन्य तथा कूटनीतिक स्तर पर बातचीत के कई दौर हुए। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ा है और संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशें तेज हुई हैं।
इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी चिनफिंग के बीच संभावित मुलाकात माना जा रहा है। दोनों नेताओं के बीच बातचीत से सीमा विवाद, व्यापार, निवेश और आपसी संबंधों को लेकर आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है। हालांकि, चीन की ओर से अभी यात्रा और संभावित द्विपक्षीय बैठक को लेकर अंतिम पुष्टि का इंतजार है।
आर्थिक मोर्चे पर भी दोनों देशों के बीच कई मुद्दे मौजूद हैं। निवेश नियमों, वीजा प्रक्रिया और तकनीकी उपकरणों से जुड़े प्रतिबंधों को लेकर कंपनियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में शी की यात्रा व्यापारिक संबंधों को सुधारने के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
ब्रिक्स सम्मेलन में शी चिनफिंग की मौजूदगी भारत-चीन संबंधों के साथ-साथ वैश्विक कूटनीति के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की आमने-सामने बातचीत से तनाव कम करने और संवाद को आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।




