पीजी और छात्रावासों की सुरक्षा जांच तेज
राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने से हुए हादसे के बाद प्रशासन ने पीजी और छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जांच तेज कर दी है। हादसे में सात लोगों की मौत के बाद दिल्ली नगर निगम और संबंधित विभागों की ओर से ऐसे भवनों का निरीक्षण किया जा रहा है, जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी और अन्य लोग रह रहे हैं। अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य कमजोर और असुरक्षित इमारतों की पहचान कर समय रहते आवश्यक कार्रवाई करना है।
जांच के दौरान भवन की संरचनात्मक मजबूती, निर्माण की स्थिति, अतिरिक्त मंजिलों की वैधता और सुरक्षा मानकों का पालन किए जाने की जानकारी जुटाई जा रही है। इसके अलावा भवन में आग से बचाव की व्यवस्था, आपातकालीन निकास, बिजली के तारों की स्थिति और अन्य जरूरी सुरक्षा सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जिन इमारतों में गंभीर खामियां मिलेंगी, उनके मालिकों और संचालकों को सुधार के निर्देश दिए जा सकते हैं।
सत्य निकेतन हादसे के बाद आसपास की कुछ इमारतों को लेकर भी सुरक्षा संबंधी चिंताएं सामने आई हैं। प्रशासन ने जोखिम वाली संरचनाओं को खाली कराने और जरूरत पड़ने पर उन्हें हटाने की कार्रवाई शुरू की है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी भवन को केवल इसलिए सुरक्षित नहीं माना जा सकता कि उसमें लंबे समय से लोग रह रहे हैं। नियमित संरचनात्मक जांच बेहद जरूरी है।
पीजी और छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि किराया और सुविधाओं के साथ भवन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। प्रशासन की जांच से उम्मीद है कि असुरक्षित भवनों की पहचान होगी और संचालकों को निर्धारित नियमों का पालन करने के लिए बाध्य किया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, केवल हादसे के बाद जांच करना पर्याप्त नहीं है। राजधानी में पीजी, छात्रावास और अन्य बहुमंजिला आवासीय भवनों का नियमित सुरक्षा निरीक्षण होना चाहिए। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ समय रहते कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में सत्य निकेतन जैसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके।




