राजस्थान में पहली बार देखी गई दुर्लभ ‘Lesser Blue-Wing’ dragonfly, उदयपुर का झाड़ोल बना जैव विविधता का नया केंद्र

Rare 'Lesser Blue-Wing' dragonfly seen for the first time in Rajasthan, Udaipur's Jhadol becomes new center of biodiversity

 डॉ. कमलेश शर्मा – राजस्थान की जैव विविधता ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उदयपुर जिले की झाड़ोल तहसील के ब्राह्मणों का खेरवाड़ा गांव में पहली बार ‘लेसर ब्ल्यू-विंग’ ड्रैगनफ्लाई (Rhyothemis triangularis) देखी गई है। यह खूबसूरत और दुर्लभ प्रजाति अब राजस्थान के जैव विविधता मानचित्र पर अपनी जगह बना चुकी है। इससे पहले यह प्रजाति भारत के केवल सात राज्यों में पाई जाती थी।


🌿 ‘लेसर ब्ल्यू-विंग’ ड्रैगनफ्लाई की खास बातें

इस ड्रैगनफ्लाई की पहचान इसके अनोखे आधे नीले और आधे सफेद रंग के पंखों से होती है, जो इसे एक बेहद आकर्षक और खास लुक देते हैं। इसके साथ ही नीला-काला पेट, धड़ और टांगें इसे अन्य प्रजातियों से अलग करती हैं। इसे वैज्ञानिक भाषा में Rhyothemis triangularis कहा जाता है, और इसके पंखों की नीलिमा के कारण इसे ‘लेसर ब्ल्यू-विंग’ भी कहा जाता है।


🚩 राजस्थान में पहली बार हुई उपस्थिति

सेवानिवृत्त वन अधिकारी डॉ. सतीश कुमार शर्मा और फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी के पर्यावरणविदों की टीम ने इस दुर्लभ ड्रैगनफ्लाई की खोज की पुष्टि की है। राजस्थान के लिए यह एक गर्व का पल है, क्योंकि इससे राज्य की जैव विविधता और भी समृद्ध हुई है।


📚 वैज्ञानिक मान्यता और शोध

इस खोज पर आधारित विस्तृत शोध-पत्र “जर्नल ऑफ थ्रेटन्ड टैक्सा” के जून 2025 वॉल्यूम 17, अंक 6 में प्रकाशित हुआ है। इस शोध ने इस प्रजाति की राजस्थान में उपस्थिति को औपचारिक रूप से मान्यता दी है और जैव संरक्षण के क्षेत्र में राज्य के प्रयासों को बल दिया है।


🌍 प्रकृति और पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण संदेश

यह दुर्लभ खोज यह संदेश देती है कि हमारे जंगल, गांव और पारिस्थितिकी तंत्र आज भी अनमोल और विविध जीवन रूपों के संरक्षण स्थल बने हुए हैं। राजस्थान की जैव विविधता को सुरक्षित रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। प्रकृति से जुड़ी ऐसी खोजें हमें याद दिलाती हैं कि पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता कितनी जरूरी है।


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