अमृतसर के पापड़ उद्योग पर संकट, कारीगरों की रोज़ी-रोटी पर असर

अमृतसर का प्रसिद्ध पापड़ उद्योग इन दिनों गंभीर संकट का सामना कर रहा है। कभी देश-विदेश में अपनी खास पहचान रखने वाला यह पारंपरिक उद्योग अब कच्चे माल की बढ़ती कीमतों, घटती मांग और आधुनिक प्रतिस्पर्धा के कारण कमजोर पड़ता नजर आ रहा है।

स्थानीय कारीगरों का कहना है कि आटे, मसालों और तेल जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई है। दूसरी ओर, बाजार में मशीन से बने सस्ते और बड़े ब्रांड्स के पापड़ों की भरमार हो गई है, जिससे छोटे कारीगरों का व्यवसाय प्रभावित हो रहा है।

इस उद्योग से जुड़े हजारों परिवारों की आजीविका इस पर निर्भर है। खासतौर पर महिलाओं के लिए यह रोजगार का एक महत्वपूर्ण साधन रहा है, लेकिन वर्तमान हालात के कारण उनकी आय में भारी गिरावट आई है। कई छोटे उत्पादन इकाइयों को बंद करने की नौबत आ गई है।

व्यापारियों का कहना है कि अगर समय रहते इस उद्योग को समर्थन नहीं मिला, तो यह पूरी तरह खत्म हो सकता है। उन्होंने सरकार से कच्चे माल पर सब्सिडी, सस्ते लोन और बाजार में उचित समर्थन की मांग की है।

वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि इस पारंपरिक उद्योग को बचाने के लिए आधुनिक तकनीक और मार्केटिंग रणनीतियों को अपनाना जरूरी है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और ब्रांडिंग के जरिए इसे फिर से मजबूती दी जा सकती है।

कुल मिलाकर, अमृतसर का पापड़ उद्योग आज एक मुश्किल दौर से गुजर रहा है और इसे बचाने के लिए त्वरित और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।

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