दिल्ली में 78 हजार पुराने भारी वाहनों की पहचान
दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार ने अभी से तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में राजधानी में पंजीकृत करीब 78 हजार पुराने भारी वाहनों की पहचान की गई है। इनमें मुख्य रूप से बीएस-3 और बीएस-4 श्रेणी के भारी वाहन शामिल हैं। सरकार अब वाहन मालिकों को इन पुराने वाहनों की जगह बीएस-6, सीएनजी या विद्युत वाहनों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की योजना पर काम कर रही है।
सरकार का कहना है कि पुराने भारी वाहन प्रदूषण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इसलिए इनके स्थान पर अपेक्षाकृत स्वच्छ तकनीक वाले वाहन लाने से परिवहन क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है। फिलहाल पुराने वाहनों को बदलने की प्रक्रिया स्वैच्छिक रखी गई है। सरकार का जोर वाहन मालिकों को आर्थिक लाभ देकर नई गाड़ियां अपनाने के लिए प्रेरित करने पर है।
इस योजना के तहत पात्र वाहन मालिकों को कई तरह की आर्थिक सुविधाएं मिलने की संभावना है। इनमें मोटर वाहन कर में पूरी छूट, पंजीकरण शुल्क में छूट, वाहन ऋण पर पांच प्रतिशत तक ब्याज सहायता और संबंधित वाहन निर्माताओं की ओर से आठ प्रतिशत तक की छूट शामिल है। सरकार इस अभियान को केंद्र की करीब 9,585 करोड़ रुपये की ‘परिवर्तन’ योजना से भी जोड़ रही है। इस योजना का उद्देश्य दिल्ली और आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कम प्रदूषण फैलाने वाले व्यावसायिक वाहनों को बढ़ावा देना है।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए केवल वाहनों पर ही ध्यान नहीं दिया जा रहा है। दिल्ली सरकार ने निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे के प्रबंधन के लिए संग्रहण केंद्रों की संख्या 106 से बढ़ाकर 125 कर दी है। इसके अलावा प्रदूषण वाले क्षेत्रों की निगरानी के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लैस कैमरों का इस्तेमाल भी बढ़ाया जा रहा है। ऐसे कैमरों से करीब दो हजार स्थानों पर प्रदूषण नियंत्रण नियमों के उल्लंघन की पहचान की गई है।
अधिकारियों के अनुसार जिला स्तर पर कार्यबल गठित किए जा रहे हैं, जो यातायात जाम और प्रदूषण के प्रमुख स्थानों की पहचान कर स्थानीय स्तर पर समाधान तलाशेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने से पहले इन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।




