सड़क सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार की बड़ी पहल, दोपहिया रोड एम्बुलेंस के नए नियम जल्द

सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने दोपहिया रोड एम्बुलेंस (बाइक एम्बुलेंस) से संबंधित नए नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज कर दी है। सरकार का मानना है कि भीड़भाड़ वाले शहरों, संकरी गलियों और दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में बाइक एम्बुलेंस पारंपरिक एम्बुलेंस की तुलना में अधिक तेजी से घटनास्थल तक पहुंच सकती हैं, जिससे दुर्घटना के बाद शुरुआती “स्वर्णिम घंटे” के दौरान मरीज की जान बचाने की संभावना बढ़ जाती है।

प्रस्तावित नियमों के तहत बाइक एम्बुलेंस के लिए तकनीकी मानक, सुरक्षा उपकरण, चिकित्सा सामग्री, चालक की योग्यता और संचालन संबंधी दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे। इन वाहनों में प्राथमिक उपचार के लिए आवश्यक चिकित्सा उपकरण, ऑक्सीजन सिलेंडर, फर्स्ट एड किट, संचार प्रणाली तथा आपातकालीन चेतावनी संकेतक उपलब्ध कराना अनिवार्य किया जा सकता है। इसके अलावा बाइक एम्बुलेंस चालकों को विशेष प्रशिक्षण देने की भी योजना है, ताकि वे दुर्घटनास्थल पर पहुंचकर प्राथमिक उपचार प्रदान कर सकें।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का मानना है कि देश में हर वर्ष बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाएं होती हैं और कई मामलों में समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिलने के कारण जानें चली जाती हैं। ऐसे में बाइक एम्बुलेंस व्यवस्था आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह सेवा विशेष रूप से महानगरों में ट्रैफिक जाम और पहाड़ी या दुर्गम क्षेत्रों में राहत पहुंचाने में प्रभावी साबित हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इन नियमों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है तो दुर्घटना पीड़ितों तक चिकित्सा सहायता पहुंचने का समय काफी कम हो सकता है। इससे मृत्यु दर में कमी आने के साथ-साथ गंभीर रूप से घायल लोगों के उपचार की सफलता की संभावना भी बढ़ेगी।

सरकार का कहना है कि राज्यों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और संबंधित एजेंसियों से प्राप्त सुझावों के आधार पर अंतिम दिशा-निर्देश तैयार किए जा रहे हैं। नए नियम लागू होने के बाद देशभर में बाइक एम्बुलेंस सेवाओं के संचालन के लिए एक समान मानक व्यवस्था विकसित होगी, जिससे सड़क सुरक्षा और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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