किसान पानी के लिए भटक रहे हैं और सरकार पानी बेच रही है: गोपाल इटालिया
आम आदमी पार्टी के विसावदर के विधायक गोपाल इटालिया ने आज विधानसभा में आयोजित पत्रकार परिषद में अपनी बात रखते हुए कहा कि आज विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान गृह मंत्री का दिन था, तो मेरा सवाल यह था कि 2012 में सुरेंद्रनगर के थानगढ़ में दलित समाज के निर्दोष युवाओं पर पुलिस द्वारा गोलीबारी की गई, जिसमें कुछ युवाओं की मृत्यु हुई और सरकार ने तथाकथित एसआईटी बनाई। आज तक भी दलित समाज न्याय की मांग कर रहा है लेकिन न्याय नहीं मिला है। मेरा सवाल था कि 2013 में उस समिति की रिपोर्ट आई और उसमें जो कार्रवाई करने की बात कही गई थी, क्या सरकार ने कदम उठाए या नहीं? तब जवाब मिला कि रिपोर्ट विचाराधीन है, मतलब 2013 से आज तक ये लोग अभी भी विचार ही कर रहे हैं। मेरा दूसरा सवाल था कि राजकोट सिटी, राजकोट जिला और भावनगर जिले में कुल कितनी एफआईआर दर्ज हुई और कुल कितनी घटनाओं में आरोपियों की जुलुस निकाला गया? जवाब मिला कि 96221 एफआईआर दर्ज हुईं, जिनमें से केवल 251 घटनाओं में जुलुस निकाला। मेरा सवाल है कि सभी लोगों की जुलुस क्यों नहीं निकाला? गरीब और लाचार लोगों की जुलुस निकलता है। गुजरात में पुलिस किराये पर मिलती है, यह एक दुखद बात सामने आई है। जब किसी कंपनी को किसी किसान के खेत से लाइन डालनी हो और खंभे लगाने हों, तब कंपनी सरकार से पुलिस किराये पर मांगती है। कच्छ जिले में पिछले दो वर्षों में कम से कम 12 करोड़ रुपये लेकर पुलिस किराये पर दी गई है और उस पुलिस ने किसानों पर दमन किया, दबंगई की और जबरदस्ती कंपनियों की लाइनें किसानों के खेतों में डलवाईं। जिसके पास पैसे हैं, पुलिस उसे किराये पर दी जाती है, तो यह दबंगई और अन्याय है।
आगे विधायक गोपाल इटालिया ने कहा कि बजट में सरकार बहुत भाषण करती है कि पैसा कहाँ जाएगा, लेकिन पैसा कहाँ से आएगा इसका अध्ययन मैंने आज किया। बजट के दिन दी गई एक पुस्तक से मुझे पता चला कि यह सरकार पानी बेचती है। जनता के टैक्स से बने बांधों में ईश्वर ने जो पानी भेजा है, उसे सरकार बेच रही है। हाथमती सिंचाई योजना से सिंचाई का पानी देने के बदले सरकार को 52 लाख की आय होगी। और अन्य प्रयोजन के पानी की बिक्री से 1 करोड़ 70 लाख आएंगे। तो यह अन्य क्या है? क्या भाजपा नेताओं की फैक्ट्रियों को पानी दिया जाएगा? उकाई सिंचाई योजना से सिंचाई के लिए 40 लाख का पानी सरकार बेचेगी। घरेलू उपयोग के लिए 1 करोड़ का पानी बेचेगी। और अन्य प्रयोजन के लिए 100 करोड़ 50 लाख का पानी सरकार बेचेगी। इस तरह अनेक बांधों और नदियों का पानी सरकार भाजपा नेताओं और परिचितों की फैक्ट्रियों को करोड़ों-अरबों रुपये का हजारों करोड़ लीटर पानी बेच रही है। जबकि दूसरी ओर किसान पानी के लिए भटक रहे हैं।
बाद में आम आदमी पार्टी विसावदर के विधायक गोपाल इटालिया ने गुजरात सरकार के चार लाख करोड़ रुपये के बजट पर विस्तृत आंकड़ात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं। यह बजट विकास आधारित नहीं बल्कि जनता से उगाही आधारित बजट है। उन्होंने कहा कि सरकार जो चार लाख करोड़ के बजट की बात करती है, पैसा कहाँ से आएगा? सरकार ने इस पुस्तिका में एक और बात बताई है कि सरकार 45,412 करोड़ रुपये वसूलना चाहती है। वह कर पर 250 करोड़ का ब्याज और ब्याज पर 75 करोड़ का दंड लेकर पैसा वसूलना चाहती है। नई शर्त से पुरानी शर्त में जाने पर जमीनधारकों से प्रीमियम के नाम पर लगभग 2,000 करोड़ रुपये वसूलने की संभावना दिखाई गई है। जमीन मापनी के मुद्दे पर पिछले वर्ष 71 करोड़ रुपये की आय दर्ज हुई थी और अगले वर्ष लगभग 50 करोड़ रुपये आय का अनुमान है। सरकारी परती जमीन की बिक्री से भी आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। पिछले वर्ष 214 करोड़, उससे पहले 302 करोड़ और 300 करोड़ की जमीन बेची गई थी, जबकि अगले वर्ष लगभग 352 करोड़ रुपये आय का अनुमान रखा गया है। उन्होंने कहा कि स्टाम्प ड्यूटी से सरकार बड़ी आय प्राप्त कर रही है। नॉन-ज्यूडिशियल स्टाम्प से अगले वर्ष 18,282 करोड़ रुपये आय का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष 17,272 करोड़ और उससे पहले 14,958 करोड़ रुपये वसूले गए थे। ज्यूडिशियल स्टाम्प से 141 करोड़ रुपये आय दर्शाई गई है। दारूबंदी होने के बावजूद शराब और अल्कोहल संबंधित आय में पिछले वर्ष 240 करोड़, उससे पहले 200 करोड़ और अगले वर्ष 264 करोड़ रुपये आय का अनुमान रखा गया है। बिजली उपयोग कर से अगले वर्ष 13,006 करोड़ रुपये वसूलने का अनुमान है।
विधायक गोपाल इटालिया ने आगे कहा कि शिक्षा क्षेत्र में प्राथमिक शिक्षा कर से 656 करोड़, माध्यमिक शिक्षा से 29 करोड़ और विश्वविद्यालय तथा उच्च शिक्षा से 79 करोड़ रुपये मिलाकर लगभग 803 करोड़ रुपये वसूले जाएंगे। इसके अलावा GPSC और UPSC जैसी परीक्षाओं के फॉर्म फीस से पिछले वर्ष 27 करोड़ और अगले वर्ष लगभग 15.45 करोड़ रुपये आय का अनुमान है। स्वास्थ्य सेवाओं से पिछले वर्ष मरीजों से 950 करोड़ रुपये वसूले गए थे, उससे पहले 302 करोड़ और अगले वर्ष 1,045 करोड़ रुपये वसूलने का अनुमान रखा गया है। किसानों से भी बीज बिक्री से 11.49 करोड़, खाद और रासायनिक खाद बिक्री से 14.16 करोड़ और विभिन्न कृषि सेवाओं सहित कुल लगभग 1,159 करोड़ रुपये वसूले जाएंगे। पुलिस विभाग को “अन्य पक्षकारों को उपलब्ध कराई गई पुलिस” से पिछले वर्ष 800 करोड़, उससे पहले 679 करोड़ और अगले वर्ष 880 करोड़ रुपये आय का अनुमान है। उन्होंने बजट के खर्च के आंकड़ों पर भी प्रकाश डाला। चार लाख करोड़ के कुल बजट में से 1,07,000 करोड़ रुपये सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में जाएंगे, 43,000 करोड़ रुपये ऋण चुकौती में खर्च होंगे और लगभग 1,07,000 करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के रूप में दर्शाए गए हैं। कृषि विभाग के लिए 24,000 करोड़ आवंटित करने के बावजूद उपयोग केवल 16,000 करोड़ होने का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि बड़ी आवंटन घोषणाएं की जाती हैं, लेकिन वास्तविक खर्च कम रहता है। भारतीय जनता पार्टी सरकार पर आरोप लगाया कि चार लाख करोड़ का बजट जनता की जेब खाली करके तैयार किया गया है और विकास के बड़े दावों के पीछे की वास्तविकता जनता को समझना जरूरी है।




