Uttarakhand में नकली दवाओं के निर्माण पर नजर रखने को नहीं कोई मजबूत तंत्र, हादसा होने के बाद जागता है विभाग

उत्तराखंड में नकली दवाओं के निर्माण को रोकने के लिए कोई मजबूत तंत्र नहीं है। फार्मा कंपनियों का पंजीकरण एक प्रक्रिया के बाद होता है, और विभाग नियमित रूप से सैंपलिंग करता है। नमूनों को प्रयोगशाला भेजा जाता है और मानकों का पालन न करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। नकली दवाओं पर निगरानी रखने की कमी चिंताजनक है।

उत्तराखंड में इस समय तीन सौ से अधिक फार्मा कंपनियां हैं। इनमें से अधिकांश कंपनियों का मुख्यालय दिल्ली अथवा अन्य दूसरे राज्यों में है। नई कंपनियों को राज्य औषधि नियंत्रण प्राधिकरण के तहत पंजीकृत किया जाता है। जिसकी सूचना केंद्रीय औषधि नियंत्रण प्राधिकरण को भी भेजनी होती है। पूर्व में यह देखा गया है कि कई फर्जी कंपनियां बिना पंजीकरण के ही प्रदेश में लंबे समय से दवा बनाने का काम कर रही थीं। ऐसी कंपनियों की शिकायत मिलने के बाद ही इन पर कार्रवाई हो पाई है।

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