बेटा नहीं कर रहा देखभाल तो क्या वापस मिल सकती है संपत्ति? बुजुर्ग माता-पिता के लिए हाईकोर्ट का अहम फैसला

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक वरिष्ठ नागरिक की बेटे को हस्तांतरित संपत्ति रद्द करने की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक गुजारा भत्ता की शर्त सिद्ध न हो, ट्रांसफर रद्द नहीं हो सकता। हालांकि, कोर्ट ने बेटे को गुजारा भत्ते की बकाया राशि आठ किस्तों में चुकाने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता ने धोखाधड़ी का आरोप लगाया था, लेकिन रिलीज डीड में ऐसी कोई शर्त नहीं थी।

हालांकि, कोर्ट ने बेटे को पूर्व में तय गुजारा भत्ते की पूरी बकाया राशि आठ समान मासिक किस्तों में अदा करने का निर्देश दिया। जस्टिस कुलदीप तिवारी की एकल पीठ ने जींद निवासी वरिष्ठ नागरिक शिव कुमार की याचिका पर यह आदेश सुनाया।

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