दिल्ली में 33 लाख मतदाताओं को नोटिस की तैयारी

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद करीब 33 लाख मतदाताओं के सामने अब अपने विवरण और पात्रता को स्पष्ट करने की चुनौती आ सकती है। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, प्रारूप मतदाता सूची में शामिल इन मतदाताओं के अभिलेखों में अलग-अलग तरह की विसंगतियां सामने आई हैं। ऐसे मतदाताओं को नोटिस जारी कर आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है।

अधिकारियों के मुताबिक करीब 33 लाख मतदाताओं में लगभग 19 लाख के प्रपत्रों में ऐसी तार्किक विसंगतियां मिली हैं, जिनकी आगे जांच की जरूरत है। वहीं करीब 14 लाख मतदाताओं का विवरण वर्ष 2002 की पुरानी मतदाता सूची से नहीं मिल पाया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी मतदाता का नाम जांच के लिए चिन्हित होना अपने आप में गलती या अपात्रता का प्रमाण नहीं है। कई बार परिवार की वास्तविक परिस्थितियों अथवा पुराने अभिलेखों में अंतर के कारण भी ऐसी विसंगतियां सामने आ सकती हैं।

यह पूरी प्रक्रिया विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत चल रही है। दिल्ली की प्रारूप मतदाता सूची में करीब 97.54 लाख मतदाताओं के नाम शामिल हैं, जबकि 30 जून तक उपलब्ध सूची में लगभग 1.45 करोड़ मतदाता दर्ज थे। पुनरीक्षण के दौरान करीब 47.7 लाख नाम प्रारूप सूची में शामिल नहीं किए गए। इनमें स्थान बदल चुके, अनुपस्थित, मृत और एक से अधिक स्थानों पर दर्ज मतदाताओं के मामले भी शामिल हैं।

जिन पात्र मतदाताओं का नाम प्रारूप सूची में नहीं है, उन्हें भी अपनी स्थिति सुधारने का अवसर दिया गया है। ऐसे मतदाता 30 सितंबर तक दावा प्रस्तुत कर सकते हैं। अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को जारी की जानी है।

इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने बड़ी संख्या में नामों के बाहर होने पर चिंता जताई है, जबकि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े पक्षों का कहना है कि पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है। आने वाले दिनों में नोटिस, दस्तावेजों की जांच और दावों के निपटारे के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।

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