दिल्ली में स्वास्थ्य बीमा विवाद पर उपभोक्ता आयोग का फैसला
दिल्ली के पश्चिमी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने स्वास्थ्य बीमा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बीमाधारक के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें ग्राहक पर पुरानी बीमारी की जानकारी छिपाने का आरोप लगाकर बीमा दावा अस्वीकार किया गया था। आयोग ने कंपनी को 20 लाख रुपये की बीमा राशि छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने का आदेश दिया है। इसके अलावा 35 हजार रुपये कानूनी खर्च के रूप में देने को कहा गया है।
मामला दिल्ली के सुभाष नगर निवासी वरिंदर कुमार भसीन से जुड़ा है। उन्होंने बीमा कंपनी के अधिकृत एजेंट के माध्यम से स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। भसीन का कहना था कि पॉलिसी लेते समय उन्होंने एजेंट को अपनी पत्नी की पुरानी बीमारी और उनके इलाज से संबंधित आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए थे। उन्होंने यह भी बताया था कि पत्नी का वर्ष 2014 में कैंसर का उपचार हुआ था और वे स्वयं मधुमेह से पीड़ित थे।
आयोग के अनुसार, एजेंट ने कथित तौर पर ग्राहक से खाली प्रपत्र पर हस्ताक्षर कराए और बाद में जानकारी दर्ज करने की बात कही। जब पॉलिसी की प्रति मिली तो उसमें पुरानी बीमारी के स्थान पर कोई बीमारी नहीं होने की जानकारी दर्ज थी। भसीन ने बाद में एजेंट को संदेश और ई-मेल के माध्यम से संबंधित चिकित्सकीय दस्तावेज भी भेजे और रिकॉर्ड ठीक करने का अनुरोध किया था।
वर्ष 2021 में भसीन की पत्नी को दोबारा कैंसर हुआ और उनका उपचार कराया गया। इलाज पर लाखों रुपये खर्च होने के बाद परिवार ने 20 लाख रुपये के बीमा दावे के लिए आवेदन किया। कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि पॉलिसी लेते समय बीमारी की जानकारी छिपाई गई थी। इसके बाद भसीन ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
आयोग ने कहा कि यदि ग्राहक ने एजेंट को सही जानकारी और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए थे, तो एजेंट की गलती का नुकसान ग्राहक को नहीं उठाना चाहिए। आयोग ने कंपनी को 20 लाख रुपये छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करने का निर्देश दिया। फैसले से स्वास्थ्य बीमा लेने वाले उपभोक्ताओं के अधिकारों और बीमा एजेंटों की जिम्मेदारी को लेकर महत्वपूर्ण संदेश गया है।




