कमजोर मानसून में ‘वाटर स्टॉक’ बनेगा किसानों का सहारा, जलाशयों में औसत से ज्यादा पानी

नई दिल्ली। मौसम विभाग के आकलन के अनुसार इस बार मानसून कमजोर भी रहता है तो भी किसानों के लिए निराशाजनक नहीं है। देश के बड़े जलाशयों में इस समय पर्याप्त पानी मौजूद है, जो खेती को शुरुआती झटकों से बचाने में मदद कर सकता है। मौसम विभाग ने अलनीनो के असर के कारण सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई है, लेकिन मौजूदा जल भंडारण से किसानों को राहत मिल सकती है।

किसानों को मिलेगी शुरुआती राहत
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार देश के 166 प्रमुख जलाशयों में अभी करीब 82 अरब क्यूबिक मीटर पानी है, जो पिछले साल इसी समय के 69.75 अरब क्यूबिक मीटर से ज्यादा है। इतना ही नहीं, यह पिछले दस साल के औसत 64.61 अरब क्यूबिक मीटर से भी ऊपर है। यानी इस बार गर्मी की शुरुआत में जलाशयों की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत है।

जाहिर है, जलाशयों में इतना पानी है कि मानसून के कमजोर रहने की स्थिति में खेती को सहारा मिल सकेगा। हालांकि यह मानसून की स्थिति से ही तय हो पाएगा कि जल भंडारण से किस हद तक मदद मिल पाएगी।देश में जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता 183.56 अरब क्यूबिक मीटर है, जिसके मुकाबले अभी 45 प्रतिशत पानी भरा हुआ है।

जलाशयों का पानी फसलों को देगा सहारा
फरवरी में यह स्तर करीब 66 प्रतिशत था, जो अब घटकर 45 प्रतिशत रह गया है। यह गिरावट हर साल गर्मियों में होती है, क्योंकि इस दौरान सिंचाई और अन्य जरूरतों के लिए पानी का उपयोग बढ़ जाता है। इसके बावजूद मौजूदा स्थिति नकारात्मक नहीं है।

फिलहाल रबी फसलों का अंतिम चरण चल रहा है और कई इलाकों में सिंचाई की जरूरत है। मई-जून से खरीफ की तैयारी शुरू होगी, जिसमें धान, मक्का और दलहन जैसी फसलों की बुवाई के लिए पानी जरूरी होता है।

ऐसे में जलाशयों का पानी फसलों को सहारा दे सकता है, खासकर तब जब मानसून की शुरुआत कमजोर रहती है। हालांकि आगे की तस्वीर पूरी तरह मानसून के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।

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