‘मैं खुद पाकिस्तान जाऊंगा’, ईरान संग दूसरी शांति वार्ता से पहले राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा बयान

वॉशिंगटन : मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच कूटनीतिक हलचल तेज होती नजर आ रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ शांति समझौता अब ज्यादा दूर नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि इस्लामाबाद में समझौते पर हस्ताक्षर होते हैं, तो वह स्वयं पाकिस्तान जाने के लिए तैयार हैं। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत की तैयारी चल रही है।

व्हाइट हाउस से रवाना होते वक्त ट्रंप ने कहा कि बातचीत “बहुत अच्छे तरीके से” आगे बढ़ रही है और ईरान लगभग सभी अहम मुद्दों पर सहमत हो चुका है। उनका मुख्य फोकस ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करना है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान न केवल परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, बल्कि संवर्धित यूरेनियम सौंपने को भी तैयार है। हालांकि, इस दावे की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनकर उभरी है। ट्रंप ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की सराहना करते हुए कहा कि वहां का सैन्य नेतृत्व और बातचीत कराने वाले अधिकारी “बेहद अच्छा काम” कर रहे हैं। इस्लामाबाद में पहले दौर की बातचीत हो चुकी है, जहां शांति की पहल शुरू हुई थी। हालांकि, वह बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। अब दूसरे दौर की तैयारी जारी है, लेकिन बैठक की तारीख अभी तय नहीं हुई है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि यदि बातचीत सफल रहती है, तो युद्ध “बहुत जल्द खत्म” हो सकता है। यह संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद शुरू हुआ था, जिसमें हजारों लोगों की जान गई और तेल की कीमतों में भारी उछाल आया। इस युद्ध का वैश्विक अर्थव्यवस्था, खासकर ऊर्जा बाजार, पर भी दबाव पड़ा है।

इसी बीच ट्रंप ने इजरायल और लेबनान के बीच हुए युद्धविराम को बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम पूरे क्षेत्र में शांति बहाल करने की दिशा में मदद करेगा। ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन से बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों नेताओं को व्हाइट हाउस बुलाकर आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।

हालांकि, जमीनी हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। लेबनान में हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच तनाव जारी है, और युद्धविराम के उल्लंघन की खबरें भी सामने आ रही हैं। ऐसे में स्पष्ट है कि शांति की राह आसान नहीं होगी। ट्रंप प्रशासन के लिए यह समझौता केवल कूटनीतिक सफलता ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है।

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव नजदीक हैं और ईरान के साथ जारी संघर्ष ने ट्रंप की लोकप्रियता को प्रभावित किया है। यदि वह इस युद्ध को समाप्त कराने में सफल होते हैं, तो इसका सीधा राजनीतिक लाभ उन्हें मिल सकता है। दूसरी ओर, अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सैन्य तैनाती भी बढ़ा रहा है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपने हालिया बयानों में कहा है कि यदि बातचीत विफल रहती है, तो वे ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू करने के लिए तैयार हैं।

 

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