Editorial: 54 वां विश्व आर्थिक मंच 15-19 जनवरी 2024 दावोस स्वीटजरलैंड

54th World Economic Forum 15-19 January 2024 Davos Switzerland

वैश्विक स्तरपर दुनियां के अनेकों देश अनेकों वैश्विक मंचों पर साझा प्रतिभागी बनाकर, वैश्विक सम्मेलन की साझा चर्चा कर आपसी सहमति से उसका हल निकालते हैं, जो सभी देशों के आर्थिक स्वास्थ्य मानवीय सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, आपसी मतभेद मिटाने सहित अनेकों समस्याओं का सजा हल निकाला जाता है यह मंच प्रतिवर्ष अपना सम्मेलन करते हैं। ऐसा ही एक अवसर हर देश के आर्थिक स्वास्थ्य के लिए इस कार्य व अन्य संबंधित विषयों को लेकर प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी स्विट्जरलैंड के दावोस में 15 से 19 जनवरी 2024 तक आयोजन किया जा रहा है जिसमें भारत के एक महिला केंद्रीय मंत्री के नेतृत्व में दो अन्य मंत्रियों का दलसम्मिलित हुआ है जो डब्ल्यू ई टी मंच के हर क्षेत्र और वहां के अलग-अलग संबंधित मंचों पर तीन केंद्रीय मंत्रियों ने व्यापक चर्चा व भारत की गाथाओं व विकसित भारत संकल्प की चर्चा कर भारत के अवसरों को सामने लाने व वैश्विक निवेशकों के सामने भारत की गाथा समर्थित अवसरों संबंधित अवसरों में रखी जिसकी सारी क्लिप दिनांक 17 जनवरी 2024 को देर रात दूरदर्शन पर साझा की गई जिससे प्रेरित होकर मैने आज यह आर्टिकल इस विषय पर  लिखने के लिए चुना 15 से 19 जनवरी 2024 के पांचो दिन भारत 54 वांटसीडब्ल्यू की थीम बिल्डिंग ट्रस्ट के तहत चर्चा व समाज का जोरदार आगाज दिखाया है इसलिए आज हम मीडिया में पीआईबी में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे भारत के अवसरों को सामने लाने व वैश्विक निवेशकों को के सामने भारत की गाथा रखने का स्वर्ण असम अवसर चोपन और डफ 2024 है।
साथियों बात अगर हम डब्ल्यूईएफ  बैठक 15से 19 जनवरी 2024 की करें तो, विश्व आर्थिक मंच की बैठक में प्रतिनिधित्व करने वाले भारत सरकार के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व महिला एवं बाल विकास मंत्री  करेंगी। उनके साथ पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री रेल, संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री श्र और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के डीपीआई ह हैं। विश्व आर्थिक मंच के विभिन्न सत्रों में प्रतिनिधिमंडल अन्य वैश्विक राजनीतिक और व्यापारिक लीडर्स की उपस्थिति में शिक्षा, जैव ईंधन,लिंग अंतरनवीकरणीय, सेमीकंडक्टर और विनिर्माण के विषयों पर अपने विचार रखेगा।विश्व आर्थिक मंच में भारत की प्रभावशाली उपस्थिति चार अलग-अलग स्थानों को सुरक्षित कर चिह्नित की गई है। इनमें से प्रत्येक भारत के अवसरों को सामने लाने और वैश्विक निवेशकों के सामने अपनी विकास गाथा रखने को समर्पित है। 15 जनवरी से 19 जनवरी 2024 तक स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित हो रही 54वीं विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक दमदार कहानी सामने लाता है। भारत व्यापक विषय ‘बिल्डिंग ट्रस्ट’ के तहत चर्चा और संवाद का दावा करता है। विश्व आर्थिक मंच की चुनी गई कार्य योजनाएं भारत के दृष्टिकोण जैसे विकास, कार्बन तटस्थता, स्थिरता, मजबूत अर्थव्यवस्था और ‘वसुधैव कुटुंबकम : द वर्ल्ड इज वन फैमिली(विश्व एक परिवार है)’ की अवधारणा से मेल खाती हैं। इसे भारत ने जी20 की अध्यक्षता के दौरान अपना समर्थन दिया था। दावोस में भारत की उपस्थिति हर परिस्थिति के अनुकूल वैश्विक अर्थव्यवस्था और पसंदीदा निवेश स्थान के रूप में इसकी स्थिति को सशक्त करती है। विश्व आर्थिक मंच में भारत की प्रभावशाली उपस्थिति चार अलग-अलग स्थानों को सुरक्षित कर चिह्नित की गई है। इनमें से प्रत्येक भारत के अवसरों को सामने लाने और वैश्विक निवेशकों के सामने अपनी विकास गाथा रखने को समर्पित है,(1)इंडिया एंगेजमेंट सेंटर,यह लाउंज (कक्ष) भारत की विकास गाथा को सामने लाएगा। इसमें डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, जीवंत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र और बढ़ते ऊर्जा क्षेत्र का प्रदर्शन किया जाएगा। वैश्विक स्तर के महत्वपूर्ण स्तंभों पर सीधी बातचीत संवाद को समृद्ध करेगी(2)एक्सपीरियंस इंडिया सेंटर : यह लाउंज नए भारत द्वारा संचालित तकनीकी में उछाल, इसकी जीवंत संस्कृति के साथ स्थिरता और समावेशिता की प्रतिबद्धताओं का अनावरण करेगा।(3)इंडिया इन्वेस्टमेंट सेंटर: यह सरकार-से-व्यवसाय (जी2बी) और व्यवसाय से व्यवसाय (बी2बी) नेटवर्किंग के केंद्र के रूप में काम करेगा, महत्वपूर्ण विषयों पर गोलमेज सम्मेलन, सत्र और पैनल की मेजबानी करेगा।(4)वी लीड लाउंज : इस वर्ष एक समर्पित जेंडर लाउंज ‘वी लीड लाउंज’ जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी, वित्तीय समावेशन और डिजिटल जेंडर अंतर को पाटने पर ध्यान केंद्रित करेगा। इंडिया एंगेजमेंट सेंटर ने महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी के साथ-साथ पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के डीपीआईआईटी के सचिव श्री आर.के. सिंह की उपस्थिति में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की ब्रीफिंग की मेजबानी की। इस ब्रीफिंग में विश्व आर्थिक मंच 2024 में भाग लेने के लिए दावोस में मौजूद भारतीय व्यापार जगत के लीडर्स और उद्योग मंडलों ने भाग लिया। सार्थक संवादों और पहलों के लिए इंडिया सेंटर मुख्य स्रोत के रूप में काम करता है, जो अंतरराष्ट्रीय मोर्चों पर सहयोग व व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करता है.भारतीय केंद्रों पर पहले दिन की शुरुआत ‘सीमाओं से परे : विश्व मंच पर भारत का प्रभाव’ विषय पर दमदार पैनल चर्चा के साथ हुई। आधारशिला कार्यक्रम के रूप में आयोजित इस पैनल ने वैश्विक परिदृश्य में भारत की उभरती भूमिका पर प्रकाश डाला। इन्वेस्ट इंडिया के सहयोग से पीएचडीसीसीआई ने इस पैनल का आयोजन किया, जिसने वैश्विक मंच पर भारत के योगदान और प्रभाव की व्यापक खोज की, जो भौगोलिक सीमाओं से परे होने की अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।विश्व आर्थिक मंच में 5 दिनों की अवधि में कुल 21 सत्र आयोजित किए जाएंगे। भारत अपने अवसरों का प्रदर्शन करेगा और विनिर्माण, प्रौद्योगिकी, लिंग आधारित प्रभाव, स्थिरता, गतिशीलता, स्टार्टअप, हेल्थकेयर, एआई आदि पर चर्चा के लिए दरवाजे खोलेगा। इंडिया लाउंज के साथ मिलकर विश्व आर्थिक मंच में पांच राज्य लाउंज की स्थापना भारत की समेकित और प्रमुख भूमिका को रेखांकित करती है, जो वैश्विक स्तर पर सहयोग और चर्चा को बढ़ावा देती है। इन 5 राज्यों में कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। भारतीय व्यापार प्रतिनिधियों की संख्या 80 से अधिक है और कुछ भारतीय कंपनियों ने दावोस में लाउंज के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। सीआईआई भारत की विकास गाथा के विभिन्न पहलुओं और बी20 में भारत के सफल नेतृत्व को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करते हुए सत्रों और मीडिया पैनलों की श्रृंखला का आयोजन करेगा। इसके अलावा पीएचडीसीसीआई भारत में अवसरों का प्रतिनिधित्व करने वाले विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों को प्रदर्शित करने के लिए भी सक्रिय रूप से भाग ले रहा है।
साथियों बात अगर हम भारतीय आरबीआई गवर्नर नें मंच पर परफॉर्मेंस की करें तो, जी से बढ़ रहा है भारत उन्होंने कहा है कि मजबूत घरेलू मांग के साथ, भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है. हम हाल के वैश्विक झटकों से मजबूत होकर उभरे हैं. दास ने आगे कहा कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार के साथ बाहरी संतुलन का प्रबंधन आसानी से किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि हेडलाइन मुद्रास्फीति  2022 की गर्मियों के उच्च स्तर के मुकाबले काफी हद तक कम हो गई है. इससे पता चलता है कि हमारी मौद्रिक नीति कार्रवाई और नकदी का पुनर्संतुलन असर दिखा रहा है। 2024-25 में 7 प्रतिशत की दर से बढे़गी अर्थव्यवस्थाआरबीआई गवर्नर ने कहा है कि मुख्य मुद्रास्फीति भी धीरे-धीरे क्रमिक रूप से कम हुई है, जबकि सरकार के सक्रिय आपूर्ति-पक्ष के हस्तक्षेप ने भी खाद्य कीमतों के झटके से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. दास ने उम्मीद जताई कि अगले साल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित औसत मुद्रास्फीति 4.5 प्रतिशत होगी और आरबीआई जल्द से जल्द चार प्रतिशत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध और आश्वस्त है। उन्होंने कहा है कि हमें उम्मीद है कि 2024-25 में भारतीय अर्थव्यवस्था सात प्रतिशत की दर से बढ़ेगी. सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक को दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ खुदरा मुद्रास्फीति को चार प्रतिशत पर रखने की जिम्मेदारी दी है.
साथियों बात अगर हम विश्व आर्थिक मंच को समझने की करें तो, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की मीटिंग में पेमेंट करने वाले सदस्यों और चयनित आमंत्रित होने वाले सहित लगभगतीन हज़ार प्रतिभागी एक साथ आते हैं। इन प्रतिभागियों में निवेशक, व्यापारिक नेता, राजनीतिक नेता, अर्थशास्त्री, मशहूर हस्तियां और पत्रकार शामिल होते हैं। डब्ल्यू ई की बैठक आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियों सहित वैश्विक मुद्दों की एक विस्तृत सीरीज पर केंद्रित है। इसकी चर्चाओं में भू-राजनीति, जलवायु परिवर्तन, टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और बहुत कुछ जैसे विषय शामिल हैं। बैठक में लगभग 500 सेशन होते हैं, जो पैनल डिस्कशन, वर्कशॉप्स और प्रजेंटेशन जैसे विभिन्न फॉर्मेट में आयोजित किए जाते हैं। ये सेशन प्रतिभागियों को अपनी अंतर्दृष्टि साझा करने, विचारों का आदान-प्रदान करने और वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने में सहयोग करने के लिए एक प्लेटफॉर्म प्रदान करते हैं। फोरम हितधारक जुड़ाव के महत्व पर जोर देता है। यह वैश्विक मुद्दों को संबोधित करने में विविध प्रकार के दृष्टिकोण और विशेषज्ञता सुनिश्चित करने के लिए व्यवसाय, सरकार, नागरिक समाज और शिक्षा जगत के प्रतिनिधियों को एक साथ लाता है।इसकी मीटिंग प्रतिभागियों के बीच नेटवर्किंग और सहयोग के पर्याप्त अवसर प्रदान करती है। यह विभिन्न क्षेत्रों के नेताओं को जुड़ने, रिलेशन बनाने और सकारात्मक बदलाव लाने के लिए संभावित साझेदारियों का पता लगाने की अनुमति देता है। इसके अलावा, मुख्य सेशन के अलावा, दब मीटिंग में तमाम साइड इवेंट (प्रदर्शनियां, सांस्कृतिक प्रदर्शन और सामाजिक समारोह) भी शामिल होते हैं।

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