दिल्ली में शीशे की इमारतें बन रहीं जानलेवा, आग लगने पर नहीं मिलता बाहर निकलने का रास्ता
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में अग्निशमन से बचाव का कोई ध्यान नहीं दिया जाता। यही वजह है कि जब आग लगती है तो लोग अंदर ही फंस जाते हैं और जान चली जाती है। आज के समय में इमारतों को खूबसूरत और आकर्षक दिखने के लिए शीशों का एलिवेशन के लिए उपयोग किया जाने लगा है। जो कि ग्रीन बिल्डिंग बनाने के लिए उपयोगी होती है लेकिन सुरक्षा के इंतजाम न किए जाए तो यह जानलेवा बन जाता है।

ऐसा ही कुछ दक्षिणी दिल्ली की हौजरानी अग्निकांड की इमारत में हुआ है और पालम में मार्च में हुई घटना में भी ऐसा ही देखने को मिला था। जिसके कारण धुंआ बाहर नहीं निकल पाया था।
आपातकालीन स्थिति के लिए प्रवेश व निकास की व्यवस्था
एमसीडी के पूर्व अधिशासी अभियंता जेपी वर्मा बताते हैं कि ज्यादातर ग्रीन बिल्डिंग में ऐसे शीशों का एलिवेशन को बेहतर दिखाने के लिए भी किया जाता है। यह प्रतिबंधित नहीं है लेकिन बर्शते आपातकालीन स्थिति के लिए प्रवेश व निकास की व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही यहां रेडियम की पट्टी होनी चाहिए जिस पर प्रवेश व निकास अंधेरे भी पढ़ने में आ जाए। लेकिन, लोग ऐसा नहीं कराते हैं।




