Pollution: 24 अक्टूबर को बाराखंभा रोड और 26 को दिल्ली गेट चौराहा पर चलाया जायेगा अभियान- गोपाल राय
The campaign will be run on October 24 at Barakhambha Road and on October 26 at Delhi Gate crossing - Gopal Rai
दिल्ली की ‘आप’ सरकार बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ युद्ध स्तर पर कार्य कर रही है। इसी क्रम में दिल्ली के पर्यावरण मंत्री श्री गोपाल राय ने सोमवार को “रेड लाइट ऑन – गाड़ी ऑफ” अभियान शुरू किया है। पर्यावरण मंत्री ने आईटीओ चौराहे से अभियान की शुरुआत करते हुए वाहन चालकों से रेड लाइट होने पर गाड़ी का इंजन बंद करके प्रदूषण कम करने में अपना योगदान देने की अपील की। इस दौरान गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली में इस समय के बढ़ते प्रदूषण का बड़ा कारण बायोमास बर्निंग और धूल से होने वाले प्रदूषण के साथ-साथ वाहनों से होने वाला प्रदूषण है। इसी को देखते हुए “रेड लाइट ऑन-गाड़ी ऑफ” कैंपेन शुरू किया गया है। दिल्लीवासियों को दिल्ली के बाहर से आने वाले प्रदूषण की मार झेलनी पड़ती है। पंजाब सरकार के प्रयासों के कारण पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है, वहीं हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकार इस दिशा में कोई कदम नहीं उठा रही है और वहाँ पर पराली जलाने की घटनाएं लगातार हो रही हैं।

पर्यावरण मंत्री श्री गोपाल राय ने कहा कि पिछले सालों में दिल्लीवासियों और संबंधित विभागों की मेहनत से प्रदूषण के स्तर में करीब 34.6 प्रतिशत की कमी आई है। प्रदूषण के खिलाफ इस जंग में इस बार फिर से दिल्ली तैयार है। पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने बताया कि दिल्ली सरकार ने प्रदूषण के विरुद्ध ग्रीन वॉर रूम शुरू किया है, धूल प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए एंटी डस्ट कैंपेन चला रखा है और पराली गलाने के लिए 5 हजार एकड़ में बायो डी-कंपोजर का छिड़काव करवाया जा रहा है। इसी क्रम में अब ‘रेड लाइट ऑन-गाड़ी ऑफ” कैंपेन की शुरुआत की जा रही है। श्री गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली के लोगों को दिल्ली के अंदर होने वाले प्रदूषण के साथ-साथ दिल्ली के बाहर से आने वाले प्रदूषण को भी झेलना पड़ता है, जो कि दिल्ली के प्रदूषण से दोगुना होता है। दिल्ली में तो वाहन प्रदूषण को कम करने के लिए हम सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसें चला रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आनंद विहार में उत्तर प्रदेश से आने वाली हजारों डीजल की बसें प्रदूषण फैला रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार से अनुरोध है कि वह प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए। पंजाब में सरकार के प्रयासों के कारण पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है, वहीं हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकार इस दिशा में आवश्यक प्रयास नहीं कर रही है और वहाँ पर पराली जलाने की घटनाएं लगातार हो रही हैं।




