Regional: करवा चौथ व्रत नकारात्मकता दूर कर, करता है सकारात्मक ऊर्जा का संचार
Karwa Chauth fast removes negativity and spreads positive energy
सुहागिन महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और पति की लंबी आयु के लिए निराहार रहकर रविवार को करवा चौथ का व्रत रखेंगी। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाने वाला करवा चौथ का पर्व पति के प्रति समर्पण की भावना को व्यक्त करता है। यह पति-पत्नी के बीच के रिश्ते की मधुरता और गर्मजोशी को उजागर करता है और आधुनिकता भी इस परंपरा को हिला नहीं पाई है। यह अधिक संवेदनशीलता, समर्पण और प्रेम की अभिव्यक्ति को दर्शाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पूरे दिन उपवास रखकर अपने सौभाग्य के लिए मां गौरी का व्रत रखती हैं और पूजा के बाद पति के हाथों से पानी की चुस्की लेकर व्रत खोलती हैं। प्रयागराज वन अनुसंधान केंद्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कुमुद दुबे ने कहा कि वह वैज्ञानिक बाद में हैं और पहले एक भारतीय महिला हैं, वह यथासंभव परंपराओं का पालन करने का प्रयास करती हैं। हमें अपनी प्राचीन परंपराओं और संस्कारों को मजबूती से थामे रहना चाहिए। अगर हम आधुनिकता के नाम पर इससे दूरी बना लेंगे तो हम अपनी जड़ों से कट जाएंगे और हमारा अस्तित्व ही नष्ट हो जाएगा। पश्चिमी संस्कृति के पीछे भागती और आधुनिकता का चोला ओढ़ती कुछ भारतीय महिलाएं रूढ़िवादिता के नाम पर पुरानी परंपराओं को भूलती जा रही हैं। उन्होंने बताया कि बदलते परिवेश में करवा चौथ व्रत का भी वैश्वीकरण हो गया है। अब यह पर्व देश में ही नहीं बल्कि अमेरिका, कनाडा, सिंगापुर, दुबई जैसे विकसित देशों और अन्य स्थानों पर भी धूमधाम से मनाया जाता है, जहां भारतीय रहते हैं। जम्मू, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तर प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान समेत भारत के कई अन्य राज्यों में ग्रामीण महिलाओं से लेकर आधुनिक महिलाएं तक भारतीय परंपरा के इस व्रत को रखती हैं। उन्होंने बताया कि लंदन में रहने वाली उनकी भाभी अपनी सहेलियों के साथ इस व्रत को बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ रखती हैं। डॉ. दुबे ने बताया कि पहले करवा चौथ व्रत इतना प्रचलित नहीं था। इसे बहुत ही साधारण तरीके से मनाया जाता रहा है। आधुनिक युग में सिनेमा और टीवी सीरियलों ने इस व्रत को और अधिक बढ़ावा दिया है। कुछ महिलाएं टीवी सीरियल देखकर इस व्रत को अपना रही हैं। वैसे तो यह व्रत विवाहित महिलाओं के लिए है, लेकिन आजकल कुछ अविवाहित लड़कियां भी मनचाहा वर पाने की कामना से यह व्रत रखती हैं। उन्होंने बताया कि यह व्रत पति-पत्नी के बीच विश्वास, प्रेम और पवित्रता की डोर से बंधा एक दिव्य बंधन है। यह बंधन खुशी, अपनापन और सुरक्षा का एहसास देता है। इसी बंधन को अटूट बनाए रखने की कामना से करवा चौथ का व्रत रखा जाता है। इससे आपसी प्रेम और विश्वास मजबूत होता है। बदलते परिवेश में पत्नी के साथ-साथ पति भी अपने सफल वैवाहिक जीवन के लिए करवा चौथ का व्रत रखने लगे हैं। आधुनिकता के बावजूद इस व्रत को रखने में महिलाओं की रुचि में कोई कमी नहीं आई है, बल्कि आकर्षण बढ़ा है। टीवी सीरियल और फिल्मों से इसे और बल मिला है। भावनाओं के अलावा करवा चौथ रचनात्मकता और आधुनिकता का भी पर्याय बन गया है। डॉ. दुबे ने बताया कि करवा चौथ का व्रत हमें अपनी संस्कृति से जोड़ता है। नवविवाहित महिलाएं अगर यह व्रत रखती हैं तो उन्हें पारंपरिक पुराने रीति-रिवाजों को समझने का अवसर मिलता है। यह व्रत उनमें सकारात्मक मानसिक ऊर्जा का संचार करता है। यह व्रत आध्यात्मिक और भावनात्मक शक्ति भी प्रदान करता है। यह व्यक्ति को ईश्वर के करीब लाता है और आंतरिक शांति का अनुभव कराता है। व्रत के दौरान ध्यान और प्रार्थना करने से मानसिक शांति मिलती है। इसके अलावा इससे परिवार के सदस्यों में प्रेम और एकता भी बढ़ती है। इस दिन महिलाएं एक साथ बैठकर व्रत की तैयारी करती हैं जिससे पारिवारिक बंधन मजबूत होते हैं और सामूहिकता का अनुभव होता है। डॉ. दुबे ने कहा कि बौद्धिक स्तर पर विचार किया जाए तो किसी समाज की सांस्कृतिक विरासत उसके मूल्यों, परंपराओं और साझा अनुभवों का परिणति होती है, जो एकता और उद्देश्य की भावना को बढ़ावा देती है। भारत की एकता इसकी संस्कृति में गहराई से निहित है। भारतीय संस्कृति का केंद्र हिंदू धर्म है, जो सिर्फ एक धर्म नहीं बल्कि एक व्यापक जीवन शैली है। भारतीय संस्कृति का लोकाचार हिंदू धर्म के सिद्धांतों और सह-अस्तित्व और वसुधैव कुटुंबकम के मूल दर्शन के साथ जुड़ा हुआ है।




