दिल्ली में भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज, मतदाता सूची को लेकर बढ़ा विवाद
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के मुद्दे पर विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। वहीं, भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक भ्रम फैलाने की कोशिश बताया है।
रविवार, 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी गठबंधन की बड़ी रैली आयोजित हुई। इसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया।
विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उनका कहना है कि इससे लोगों के मतदान के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करने की मांग की है।
दूसरी ओर, भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए किया जा रहा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य दोहरे और अपात्र मतदाताओं के नाम हटाना है।
इस विवाद के बीच चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। दिल्ली में मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 4 नवंबर को निर्धारित है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।




