डीयू ने विस्थापित छात्रों के लिए कक्षाओं को अस्थायी आश्रय बनाया
सत्य निकेतन इमारत हादसे के बाद प्रभावित छात्रों की सहायता के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हादसे के कारण जिन छात्रों को अपना किराये का कमरा या रहने की जगह छोड़नी पड़ी, उनके लिए विश्वविद्यालय की कुछ कक्षाओं को अस्थायी आश्रय के रूप में उपलब्ध कराया गया है। विश्वविद्यालय की इस पहल से प्रभावित छात्रों को तत्काल सुरक्षित स्थान मिलने की उम्मीद है।
सत्य निकेतन और इसके आसपास बड़ी संख्या में विद्यार्थी किराये के कमरों और पीजी में रहते हैं। इमारत गिरने की घटना के बाद छात्रों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। कई छात्रों को अपने आवास खाली करने पड़े, जबकि कुछ छात्र अपने सामान के साथ अस्थायी रूप से दूसरी जगह जाने को मजबूर हुए। ऐसे समय में विश्वविद्यालय की ओर से कक्षाओं को अस्थायी आश्रय में बदलने का निर्णय राहत देने वाला माना जा रहा है।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से प्रभावित छात्रों की जरूरतों को समझने और उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। अस्थायी आश्रय में छात्रों के ठहरने के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को छात्रों की सहायता के लिए लगाया गया है।
हादसे के बाद छात्र संगठनों ने भी सुरक्षित आवास की मांग उठाई है। छात्रों का कहना है कि राजधानी में बड़ी संख्या में विद्यार्थी निजी पीजी और किराये के मकानों में रहते हैं, लेकिन इन इमारतों की सुरक्षा जांच और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं होती।
डीयू की इस पहल के साथ अब इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। छात्रों और उनके परिवारों की मांग है कि पीजी और किराये के आवासों की नियमित जांच हो तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली में छात्र आवासों की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर प्रमुखता से सामने ला दिया है।




