नेपाल के पुनर्निर्माण में भारत की मदद

नेपाल में हाल में आई विनाशकारी बाढ़ से तबाह हुए एक विद्यालय के पुनर्निर्माण में भारत ने मदद का भरोसा दिया है। नुवाकोट जिले के बिदुर स्थित त्रिभुवन त्रिशूली माध्यमिक विद्यालय को बाढ़ ने पूरी तरह नुकसान पहुंचाया था। भारत ने अब इस विद्यालय के पूर्ण पुनर्निर्माण में सहयोग करने की घोषणा की है। यह निर्णय भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग और आपदा के समय पड़ोसी देश के साथ खड़े होने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

26 अगस्त को त्रिशूली घाटी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने विद्यालय परिसर को अपनी चपेट में ले लिया था। उस समय विद्यालय में बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद थे। विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेंद्र दवाड़ी ने खतरे के संकेत मिलते ही तत्काल कक्षाएं रुकवाकर विद्यार्थियों को सुरक्षित स्थान की ओर भेज दिया। उनकी तेजी और सूझबूझ के कारण लगभग 900 विद्यार्थियों को समय रहते परिसर से बाहर निकाला जा सका। विद्यालय में कुल 1,643 विद्यार्थी पंजीकृत थे।

भारत के नेपाल में राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने प्रधानाचार्य राजेंद्र दवाड़ी से मुलाकात की और उनकी तत्परता की सराहना की। इसी दौरान उन्होंने भारत की ओर से विद्यालय के पूर्ण पुनर्निर्माण में सहयोग देने की बात कही। विद्यालय का भारत के साथ पुराना संबंध भी रहा है। इसकी स्थापना 1950 के दशक में हुई थी और विद्यालय के नए भवन का निर्माण वर्ष 2022 में भारत की सहायता से किया गया था।

भारत इससे पहले भी नेपाल में शिक्षा और पुनर्निर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सहयोग करता रहा है। मई 2026 में भारत सरकार की सहायता से नेपाल के विभिन्न जिलों में 14 नए विद्यालयों के निर्माण के लिए समझौते हुए थे। भारत की सहायता से पहले ही कई विद्यालयों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों का पुनर्निर्माण किया जा चुका है।

नए विद्यालय के पुनर्निर्माण में सुरक्षित स्थान को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है, क्योंकि स्थानीय लोगों और विद्यालय प्रशासन का मानना है कि भविष्य में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। भारत की यह सहायता नेपाल के पुनर्वास प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान मानी जा रही है और इससे दोनों देशों के मैत्रीपूर्ण संबंधों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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