3 रुपये की सुई 30 में, 4 लाख का हर्ट वॉल्व 26 लाख में: मरीजों पर महंगे इलाज की मार; मेडिकल डिवाइस प्राइसिंग पर उठे सवाल
मेडिकल उपकरण बनाने वाली कंपनियों के संगठन ने सरकार से इनकी खुदरा कीमतें कम करने की मांग की है ताकि मरीजों पर खर्च का बोझ घटे और बीमा सस्ता हो।

25,000 रुपए में जिस पेसमेकर को आयात किया जाता है, उसकी बाजार में खुदरा कीमत दो लाख रुपए हैं। ऐसे तमाम मेडिकल उपकरण है जिनकी फैक्ट्री कीमत और खुदरा कीमत में आसमान जमीन का अंतर है।
पश्चिम एशिया संकट की वजह से कच्चे माल के दाम बढ़ने से कई फार्मा कंपनियां दवा की कीमत बढ़ाने की मांग नेशनल फार्मास्युटिकल्स प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) से की है।
बुधवार को एसोसिएशन की तरफ से मेडिकल उपकरण से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स की बैठक की गई थी और सभी ने मेडिकल उपकरणों के खुदरा दाम को तार्किक बनाने पर सहमति जताई।
एसोसिएशन के संयोजक व सिरिंज निर्माता राजीव नाथ ने बताया कि सिरिंज की खुदरा कीमत 30 रुपए की जगह 12 रुपए तो कैनुला की कीमत 120 की जगह 24 रुपए तय हो सकती है।
4 लाख के हर्ट वॉल्व की कीमत 26 लाख रुपए
आयातित हर्ट वॉल्व की कीमत चार लाख होती है जबकि मरीज को उसे 26 लाख रुपए में बेचा जाता है जिसे कम करके आठ लाख रुपए किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि एनपीपीए से उनकी एसोसिएशन कीमत को तार्किक बनाने की मांग लगातार कर रही है और अब उनकी मांग पर एनपीपीए गंभीरता से विचार किया जा रहा है।




