दिल्ली में सिनेमाघरों के लाइसेंस को लेकर नई कार्यप्रणाली

दिल्ली सरकार ने राजधानी के सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्स के लाइसेंस जारी करने, नवीनीकरण और निरीक्षण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया लागू की है। नई व्यवस्था के तहत अलग-अलग विभागों से अलग-अलग अनापत्ति प्रमाणपत्र लेने की पुरानी प्रक्रिया को समाप्त कर एकीकृत एकल-खिड़की व्यवस्था शुरू की गई है। सरकार का कहना है कि इससे लाइसेंस प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और जवाबदेह बनेगी।

नई व्यवस्था के तहत आवेदन प्रक्रिया को तकनीक आधारित बनाया गया है। सिनेमाघर संचालकों को पहले पुलिस, अग्निशमन विभाग, नगर निगम, दिल्ली जल बोर्ड और स्वास्थ्य विभाग समेत कई एजेंसियों से अलग-अलग मंजूरी लेनी पड़ती थी। इस कारण कई मामलों में लाइसेंस जारी होने में देरी होती थी। अब विभिन्न विभागों के बीच समन्वय एक ही प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।

नई कार्यप्रणाली के तहत प्रत्येक जिले में जिला लाइसेंस समिति बनाई गई है। इस समिति की अध्यक्षता उपायुक्त या जिलाधिकारी स्तर के अधिकारी करेंगे। इसमें पुलिस, अग्निशमन विभाग, नगर निगम, दिल्ली विकास प्राधिकरण, दिल्ली जल बोर्ड और जिला चिकित्सा अधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे। यही समिति निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर लाइसेंस जारी करने का अंतिम निर्णय लेगी।

इसके साथ ही जिला निरीक्षण समिति भी गठित की गई है। इसका नेतृत्व उपमंडल अधिकारी करेंगे। समिति के सदस्य संयुक्त रूप से सिनेमाघर का निरीक्षण करेंगे, जिससे अलग-अलग विभागों द्वारा बार-बार निरीक्षण करने की आवश्यकता कम होगी। नई व्यवस्था में प्रक्रिया के विभिन्न चरणों के लिए समयसीमा भी निर्धारित की गई है।

सरकार के अनुसार इस बदलाव का उद्देश्य केवल लाइसेंस प्रक्रिया को तेज करना नहीं है, बल्कि सुरक्षा मानकों को भी मजबूत बनाए रखना है। यह व्यवस्था उपहार सिनेमा अग्निकांड से संबंधित उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन की प्रक्रिया से भी जुड़ी बताई गई है। नई प्रणाली से सिनेमाघर संचालकों को राहत मिलने और विभागीय देरी कम होने की उम्मीद है।

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