यमुना नदी के पुनर्जीवन के लिए अंतरराज्यीय समन्वय समिति बनाने की सिफारिश पर चर्चा तेज
यमुना नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर एक बार फिर गंभीर प्रयासों की चर्चा तेज हो गई है। विभिन्न पर्यावरण विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और संबंधित एजेंसियों के बीच यमुना नदी के लिए एक अंतरराज्यीय समन्वय समिति गठित करने की सिफारिश पर विचार किया जा रहा है। इस समिति का उद्देश्य दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सहित यमुना बेसिन से जुड़े राज्यों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना और नदी संरक्षण के लिए साझा रणनीति तैयार करना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यमुना की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि नदी कई राज्यों से होकर गुजरती है, लेकिन उसके संरक्षण के लिए सभी राज्यों की योजनाएं अलग-अलग स्तर पर संचालित होती हैं। ऐसे में एक साझा समन्वय समिति बनने से प्रदूषण नियंत्रण, जल प्रवाह बनाए रखने, सीवेज प्रबंधन और औद्योगिक अपशिष्ट की निगरानी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रभावी निर्णय लिए जा सकेंगे।
दिल्ली में यमुना का लगभग 22 किलोमीटर का हिस्सा सबसे अधिक प्रदूषित माना जाता है। घरेलू सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और नालों का गंदा पानी नदी की स्वच्छता के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। सरकार द्वारा समय-समय पर सीवेज शोधन संयंत्रों की क्षमता बढ़ाने, नालों के उपचार और नदी तट के सौंदर्यीकरण जैसी कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि स्थायी समाधान के लिए राज्यों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
प्रस्तावित समिति में जल संसाधन, पर्यावरण, शहरी विकास और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विभागों के प्रतिनिधियों को शामिल किए जाने की संभावना है। यह समिति नदी की स्थिति की नियमित समीक्षा करेगी, परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखेगी और आवश्यकतानुसार राज्यों को सुझाव भी देगी। साथ ही, नदी में पर्यावरणीय प्रवाह बनाए रखने और जल गुणवत्ता में सुधार के लिए दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने पर भी जोर दिया जाएगा।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराज्यीय समन्वय समिति का गठन होता है और सभी राज्य मिलकर साझा जिम्मेदारी निभाते हैं, तो यमुना नदी के पुनर्जीवन अभियान को नई गति मिल सकती है। इससे न केवल नदी का प्रदूषण कम होगा, बल्कि राजधानी दिल्ली सहित करोड़ों लोगों को स्वच्छ जल, बेहतर पर्यावरण और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र का भी लाभ मिलेगा।




