ग्रेटा थनबर्ग ने भारतीय छात्र आंदोलन का किया समर्थन, वैश्विक एकजुटता की अपील
स्वीडन की प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने भारत में हाल ही में हुए छात्र आंदोलन का खुलकर समर्थन करते हुए इसे युवाओं की सामूहिक शक्ति और लोकतांत्रिक भागीदारी का मजबूत उदाहरण बताया है। लंदन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भारतीय छात्रों के संघर्ष की सराहना करते हुए कहा कि यह आंदोलन केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि न्याय, जवाबदेही और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए दुनिया भर के युवाओं को प्रेरित करने वाला अभियान है।
ग्रेटा थनबर्ग ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय छात्रों ने यह साबित कर दिया है कि जब युवा एक साझा उद्देश्य के लिए एकजुट होते हैं तो वे बड़े बदलाव की शुरुआत कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों का संघर्ष दुनिया भर के लोगों के लिए उम्मीद की किरण है और यह “जनशक्ति” की वास्तविक ताकत को दर्शाता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की कि वे ऐसे आंदोलनों के प्रति संवेदनशील रहें और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रयासों के साथ एकजुटता दिखाएं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत में छात्रों के आंदोलन को लेकर देश और विदेश में व्यापक चर्चा हो रही है। आंदोलन के समर्थन में यूरोप, अमेरिका और अन्य देशों में भारतीय प्रवासी समुदाय तथा छात्र संगठनों ने भी एकजुटता प्रदर्शन आयोजित किए। लंदन, बर्लिन, डबलिन, न्यूयॉर्क और टोरंटो जैसे शहरों में कई कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय छात्रों की मांगों के समर्थन में आवाज उठाई गई।
ग्रेटा थनबर्ग ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों, शिक्षा में पारदर्शिता और न्याय की मांग किसी एक देश का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक चिंता का विषय है। उन्होंने युवाओं से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का आग्रह किया तथा कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे जनआंदोलनों को एक-दूसरे से सीखने और सहयोग करने की आवश्यकता है।
ग्रेटा के इस समर्थन के बाद भारतीय छात्र आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक ध्यान मिला है। राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी वैश्विक हस्ती द्वारा समर्थन मिलने से आंदोलन की अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ी है। वहीं आंदोलन से जुड़े संगठनों ने कहा कि वे शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से आगे भी जारी रखेंगे।




