मनोज सोरठिया जैसे संघर्षशील नेता ही राजनीति बदल सकते हैं : गोपाल इटालिया

 

 

आम आदमी पार्टी के विसावदर के विधायक गोपाल इटालिया ने बताया कि आम आदमी पार्टी के क्रांतिकारी योद्धा मनोज सोरठिया को आम आदमी पार्टी द्वारा सूरत महानगरपालिका के वार्ड नंबर चार के उम्मीदवार के रूप में घोषित किया गया है। मनोज सोरठिया ही क्यों और सूरत में ही क्यों? इन दो सवालों के जवाब गुजरात की जनता को जानना जरूरी है। आजकल राजनीति में लंबे संघर्ष करने की मानसिकता कई नेताओं में नहीं रही है और हर नेता शॉर्टकट ढूंढता है, अच्छी ऑफर मिले तो पार्टी बदल देता है। ऐसे समय में लगातार 10-15 वर्षों तक बिना किसी पद, टिकट या अपेक्षा के एक ही पार्टी में निष्ठापूर्वक काम करने वाले व्यक्ति मनोज सोरठिया हैं। वे भावनगर जिले के महुवा तालुका के मोता गांव के एक किसान परिवार में जन्मे हैं और अपनी मेहनत से फार्मासिस्ट बने हैं, जो अपने समय में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। गांव से शहर जाकर पढ़ाई करना, अनुकूल परिस्थितियों के बिना आगे बढ़ना और फिर अपने दम पर व्यवसाय स्थापित करना, यह सब उनकी संघर्ष यात्रा को दर्शाता है। उन्होंने टेक्सटाइल इंडस्ट्री में वाटरजेट मशीनों के बड़े डीलर के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम किया, दिल्ली, सूरत और विदेशों में उनके कार्यालय थे और वे अच्छा व्यवसाय और जीवन जी रहे थे। 2012 में अन्ना आंदोलन के दौरान भ्रष्टाचार विरोधी लड़ाई से प्रेरित होकर उन्होंने अपने व्यवसाय से समय निकालकर आंदोलन में भाग लिया और बाद में राजनीति में परिवर्तन लाने के संकल्प के साथ पूर्णकालिक रूप से राजनीति में प्रवेश किया। वे अरविंद केजरीवाल के करीबी और पुराने साथी के रूप में जाने जाते हैं। 2012 से लेकर कई वर्षों तक गुजरात में आम आदमी पार्टी एक मजबूत राजनीतिक शक्ति के रूप में उभर नहीं पाई, फिर भी मनोज सोरठिया ने हर परिस्थिति में पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी और लगातार काम करते रहे। सफलता मिले या न मिले, समर्थन मिले या न मिले, टिकट मिले या न मिले, इन सबकी चिंता किए बिना उन्होंने अपने संकल्प को मजबूत रखा और अकेले प्रयास करते रहे। आज 2026 में वे आम आदमी पार्टी की ओर से सूरत महानगरपालिका के उम्मीदवार बने हैं, जो उनके लंबे संघर्ष, समर्पण और निष्ठा का परिणाम है।

 

गोपाल इटालिया ने आगे बताया कि सूरत महानगरपालिका के उम्मीदवार के रूप में मनोज सोरठिया की चयन के पीछे एक लंबा संघर्ष है। आज हम सभी यहां तक पहुंचे हैं, वह कई वर्षों के संघर्ष का परिणाम है, जिसमें मनोजभाई का योगदान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। आजकल कोई भी व्यक्ति डेढ़-दो साल संघर्ष करके चार-पांच आंदोलन करता है, तो भी कई बार रास्ता बदल देता है, लेकिन मनोज सोरठिया ऐसे कार्यकर्ता हैं जिन्होंने जेल यात्रा की है, आंदोलनों में भाग लिया है, महुवा में जेल गए हैं और कई आंदोलनों से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी और 2012 में देखा गया सपना—व्यवस्था और राजनीति में बदलाव लाने का संकल्प—लगातार बनाए रखा है। आज उसी संकल्प के साथ वे आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार बने हैं। गुजरात में आम आदमी पार्टी आज एक मजबूत राजनीतिक शक्ति के रूप में उभर रही है, जिसे नजरअंदाज करना संभव नहीं है, और इसके पीछे मनोजभाई जैसे निष्ठावान कार्यकर्ताओं का बड़ा योगदान है। वर्षों तक एक ही पार्टी से निष्ठा के साथ जुड़े रहना व्यक्ति को इस योग्य बनाता है कि पार्टी उसे उचित स्थान दे। सूरत को उम्मीदवार के रूप में चुनने के कारण को समझाते हुए उन्होंने बताया कि सूरत एक अंतरराष्ट्रीय स्तर से जुड़ा शहर है, जहां हीरा और कपड़ा उद्योग विश्वभर में प्रसिद्ध है, साथ ही समुद्री व्यापार का भी विशेष महत्व है। इतिहास में अंग्रेज भी सबसे पहले सूरत आए थे, जो इस शहर के वैश्विक महत्व को दर्शाता है। इसके बावजूद आज सूरत में टूटी सड़कें, ट्रैफिक की समस्या, कचरे के ढेर, भ्रष्टाचार, सरकारी दफ्तरों में परेशानी और अवैध निर्माण जैसी समस्याएं हैं। जीवन के लिए आवश्यक सुविधाएं जैसे अच्छी स्कूलें, सरकारी अस्पताल, बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट और सुव्यवस्थित शहरी विकास अभी भी अधूरा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्कूलें, अस्पताल, सड़कें, कॉलेज, टाउन प्लानिंग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और नागरिक सेवाओं जैसी सुविधाओं का अभाव है। इन समस्याओं के समाधान और सूरत को अंतरराष्ट्रीय स्तर का शहर बनाने के विजन के साथ आम आदमी पार्टी ने मनोज सोरठिया को वार्ड नंबर चार का उम्मीदवार बनाया है। आशा है कि सूरत की जनता उनका और पार्टी के अन्य उम्मीदवारों का समर्थन करेगी और आने वाले पांच वर्षों में सूरत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित शहर बनाने का मार्ग प्रशस्त होगा।

 

 

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