गुजरात का ‘बनास मॉडल’ बना मिसाल: गोबर से पैदा हो रही समृद्धि, 15 राज्य अपनाएंगे बायो-सीएनजी तकनीक

गुजरात का बनास बायो-सीएनजी मॉडल ‘वेस्ट टू वेल्थ’ और हरित ऊर्जा का सफल उदाहरण बन गया है। यह मॉडल गोबर को स्वच्छ ईंधन और जैविक उर्वरक में बदलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है। केंद्र सरकार के प्रयासों से 15 राज्य इसे अपना रहे हैं। गुजरात सरकार ने नए प्लांटों के लिए ₹60 करोड़ आवंटित किए हैं, जिससे किसानों की आय बढ़ रही है और पर्यावरण संरक्षण भी हो रहा है।

BIO-CNG क्षेत्र को गुजरात सरकार का बजटीय समर्थन, ₹60 करोड़ का आवंटन
गुजरात सरकार ने इस अभिनव पहल की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए BIO-CNG क्षेत्र को अपनी बजटीय प्राथमिकताओं में शीर्ष पर रखा है। मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सहकारी दुग्ध उत्पादक संघों द्वारा नए प्लांट स्थापित करने के लिए ₹60 करोड़ का विशेष प्रावधान किया है। इस बजटीय सहायता का उद्देश्य डेयरी क्षेत्र को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का केंद्र बनाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना है। उल्लेखनीय है कि इस योजना के तहत राज्य में चरणबद्ध तरीके से लगभग 10 BIO-CNG प्लांट स्थापित करने की योजना प्रस्तावित है।

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