सरकार ने गोल-गोल जलेबी जैसा जवाब दिया, मूल प्रश्न टाल दिया : गोपाल इटालिया

विधानसभा में प्रश्नोत्तरी के मुद्दे पर मीडिया से बात करते हुए आम आदमी पार्टी के विसावदर के विधायक गोपाल इटालिया ने कहा कि कल, 9 मार्च 2026 को विधानसभा में मेरा एक प्रश्न था, क्रमांक 25। वह अत्यंत महत्वपूर्ण और आवश्यक मुद्दा था, लेकिन सरकार ने मुझे उसका वास्तविक जवाब देने के बजाय गोल-गोल जलेबी जैसा जवाब दिया। मेरा स्पष्ट प्रश्न यह था कि वडोदरा और अहमदाबाद में शराब पीकर कितने लोग पुलिस की पकड़ में आए, कितने लोगों के खिलाफ शराब पीने के अपराध के तहत एफआईआर दर्ज हुई, और जितनी एफआईआर शराब पीने की दर्ज हुई हैं, उसके सामने शराब बेचने की कितनी एफआईआर दर्ज हुई हैं? सीधा सवाल है कि जो व्यक्ति शराब पीता है उसके पास दो ही रास्ते होते हैं, वह घर पर बनाकर पीता है या बाजार से खरीदता है। सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार 32,464 लोग शराब पीते पकड़े गए हैं। अब सवाल यह है कि इन 32,464 लोगों ने कहीं न कहीं से शराब खरीदी होगी। तो सामने उतने ही शराब बेचने वाले क्यों नहीं पकड़े जाते?

गोपाल इटालिया ने आगे कहा कि मेरा सीधा सवाल यह था कि 32,464 लोग पीते पकड़े गए, तो इन लोगों को शराब बेचने वाला कौन है? गुजरात में वे कभी पकड़े क्यों नहीं जाते? कई बार बड़े फार्महाउस में जाकर शराब पीते हुए लोग पकड़े जाते हैं, उनकी रील्स बनाई जाती हैं और सार्वजनिक की जाती हैं, लेकिन शराब बेचने वाले कहां हैं? जितने पीने वाले होते हैं उतने बेचने वाले भी होने चाहिए, क्योंकि हर व्यक्ति किसी न किसी से शराब खरीदकर ही पीता है। फिर भी सरकार शराब बेचने वालों की जांच नहीं करती। केवल शराब पीते हुए कोई पकड़ा जाता है तो उसे पकड़कर तमाशा बनाया जाता है और रील्स बनाकर वाहवाही लूटी जाती है। मेरे प्रश्न का विधानसभा में जवाब देने के लिए सरकार तैयार नहीं है कि इन 32,464 लोगों ने शराब कहां से खरीदी, किससे ली, कब ली इसकी जांच क्यों नहीं की जाती। यदि सही जांच की जाए तो शराब पीने वाले और शराब बेचने वाले दोनों मिलाकर 60 हजार से अधिक लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। यह स्थिति दर्शाती है कि शराब बेचने वालों के हफ्ते शायद ऊंचे स्तर तक पहुंचते होंगे और केवल पीने वालों के खिलाफ ही कार्रवाई की जाती है। इसलिए हम सरकार का ध्यान आकर्षित करते हैं कि कानून के अनुसार समान और उचित कार्रवाई होनी चाहिए।

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