ममता बनर्जी का बयान संविधान और लोकतंत्र पर हमला है – भाजपा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा चुनाव आयोग की स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वस्थ चुनाव प्रक्रिया के विरुद्ध दिया गया बयान अत्यंत गंभीर, गैर-जिम्मेदाराना और हिंसा भड़काने की आशंका से युक्त है।

➡️ यह न केवल तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक नैतिकता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि पश्चिम बंगाल सरकार की संवैधानिक निष्ठा को भी कठघरे में खड़ा करता है।
➡️ जब कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है, तो राज्य की मुख्यमंत्री का स्वयं चुनावी प्रक्रिया को थ्रेटन करना, देश के संघीय ढांचे के लिए गंभीर चिंता का विषय है।


🔍 ममता जी का दोहरापन?

भारतीय जनता पार्टी ममता बनर्जी जी से पूछना चाहती है:
क्या आप वही ममता बनर्जी नहीं हैं जिन्होंने घुसपैठियों के मुद्दे पर लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष फाइल फेंक दी थी, केवल इसलिए कि उस पर चर्चा की अनुमति नहीं मिल रही थी?

📌 आज जब चुनाव आयोग अवांछित और फर्जी वोटरों की पहचान कर रहा है, तो आप उसका विरोध कर रही हैं। यह साफ़ दर्शाता है कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए किस प्रकार अपने पूर्व के विचारों से पलटना कुछ नेताओं की आदत बन चुकी है।


⚠️ तृणमूल सरकार और हिंसा का इतिहास

पश्चिम बंगाल में बीते वर्षों में जिस प्रकार चुनावी और राजनीतिक हिंसा को संरक्षण मिला, उस पर देश के सर्वोच्च न्यायालय तक ने कठोर टिप्पणियाँ की हैं।
अब यदि स्वयं मुख्यमंत्री इस प्रकार का बयान दें, तो यह केवल राजनीतिक संकट नहीं, बल्कि संवैधानिक चेतावनी है।


📢 भाजपा का स्पष्ट संदेश:

“अगर तृणमूल कांग्रेस की यही सोच है, तो पश्चिम बंगाल की स्थिति यही कहती है –
‘आगे घोर अंधेरा है, जब पहरेदार लुटेरा है।’


🔴 भारतीय जनता पार्टी चुनाव आयोग की निष्पक्ष कार्यप्रणाली में पूर्ण विश्वास व्यक्त करती है और यह अपेक्षा करती है कि लोकतंत्र की मूल भावना को ठेस पहुँचाने वाले बयानों पर कड़ी कार्रवाई हो।

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