दिल्ली में प्रदूषण जांच के लिए 334 टीमें तैनात
सर्दियों में वायु प्रदूषण बढ़ने की आशंका को देखते हुए दिल्ली सरकार ने प्रदूषण के खिलाफ अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। राजधानी में प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों की पहचान और उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई के लिए कुल 334 निगरानी टीमें तैनात की जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य सर्दियों में हवा की गुणवत्ता खराब होने से पहले ही प्रदूषण के प्रमुख कारणों पर प्रभावी नियंत्रण करना है।
इस अभियान के तहत दिल्ली के 39 उपमंडलों में 78 विशेष टीमें चौबीसों घंटे निरीक्षण करेंगी। इनमें से कई दल रात के समय भी मैदान में रहेंगे। ये टीमें कचरा और जैविक पदार्थ जलाने, निर्माण एवं तोड़फोड़ से निकलने वाली धूल, औद्योगिक प्रदूषण, प्रतिबंधित ईंधन के इस्तेमाल और निर्माण मलबे की अवैध तरीके से डंपिंग पर नजर रखेंगी। डीजल जनरेटरों से जुड़े नियमों के पालन की भी जांच की जाएगी।
इसके अलावा 256 वार्डों में स्थानीय स्तर पर निगरानी के लिए अलग टीमें लगाई जाएंगी। इनमें नगर निगम के 250 वार्ड, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद के चार क्षेत्र और दिल्ली छावनी क्षेत्र के दो वार्ड शामिल हैं। इन टीमों की जिम्मेदारी स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करने और शिकायतों पर कार्रवाई करने की होगी। ग्रीन दिल्ली तथा 311 जैसे माध्यमों से मिलने वाली शिकायतों के समयबद्ध समाधान पर भी जोर दिया जाएगा।
दिल्ली के 48 चिन्हित प्रदूषण हॉटस्पॉट पर विशेष अभियान चलाया जाएगा। यहां अनधिकृत औद्योगिक गतिविधियों, कचरा जलाने और निर्माण संबंधी नियमों के उल्लंघन पर सख्ती की जाएगी। धूल नियंत्रण, सड़क की खराब स्थिति और खुले में मलबा डालने जैसी समस्याओं पर भी संबंधित विभाग कार्रवाई करेंगे।
केंद्र और दिल्ली-एनसीआर के अन्य राज्यों के साथ समन्वय पर भी जोर दिया गया है। सितंबर 2026 से मार्च 2027 तक चलने वाली प्रदूषण नियंत्रण रणनीति में दिल्ली के साथ हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश भी शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि इस बार रणनीति केवल प्रदूषण बढ़ने के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से निगरानी और त्वरित प्रवर्तन पर केंद्रित होगी।




