मतदाता सूची पर आम आदमी पार्टी के सवाल

दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद जारी हुई मतदाता सूची को लेकर आम आदमी पार्टी और निर्वाचन आयोग के बीच विवाद तेज हो गया है। आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया है कि आयोग ने हटाए गए मतदाताओं की सूची राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराई, लेकिन उसमें मतदाताओं के नाम के साथ उनके पते और फोन नंबर नहीं दिए गए। पार्टी का कहना है कि इन जानकारियों के अभाव में यह पता लगाना कठिन है कि किसी मतदाता का नाम वास्तव में स्थानांतरण, मृत्यु या अन्य कारणों से हटाया गया है या फिर किसी तरह की गलती हुई है।

दिल्ली की नई प्रारूप मतदाता सूची में लगभग 47.5 लाख मतदाता पहले की सूची में दर्ज होने के बावजूद दिखाई नहीं दे रहे हैं। निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो स्थानांतरित हो चुके हैं या सत्यापन के दौरान उपलब्ध नहीं मिले। इसके अलावा मृत मतदाताओं और दोहरे पंजीकरण वाले नामों को भी हटाया गया है। प्रारूप सूची में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 97.5 लाख रह गई है, जो पिछली सूची की तुलना में करीब 32.8 प्रतिशत कम है।

आप का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के बाद पारदर्शिता बेहद जरूरी है। पार्टी ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि राजनीतिक दलों को पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे अपने स्तर पर भी सूची का सत्यापन कर सकें। सौरभ भारद्वाज के अनुसार, पार्टी ने लिखित रूप से और अधिकारियों के साथ बैठकों में भी यह जानकारी मांगी थी, लेकिन उनका दावा है कि अपेक्षित विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया। निर्वाचन आयोग की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

इस बीच जिन मतदाताओं का नाम प्रारूप सूची में नहीं है, उनके पास दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर है। नाम दोबारा शामिल कराने के लिए 30 सितंबर तक आवेदन किया जा सकता है। ऐसे में राजनीतिक विवाद के साथ-साथ आम मतदाताओं के लिए भी अपनी स्थिति की जांच करना महत्वपूर्ण हो गया है।

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