दिल्ली में बदलेगा बेड एंड ब्रेकफास्ट व्यवस्था का ढांचा, नए नियमों से सुरक्षा और सुविधाओं पर जोर

दिल्ली में बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठानों को संचालित करने वाले पुराने कानून में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। दिल्ली विधानसभा ने करीब दो दशक पुराने बेड एंड ब्रेकफास्ट कानून को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। सरकार का उद्देश्य बदलते पर्यटन और आवास क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप अधिक लचीली, आधुनिक और सुरक्षित व्यवस्था तैयार करना है। यह बदलाव खास तौर पर हालिया आग की घटनाओं के बाद सुरक्षा मानकों को मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सरकार की प्रस्तावित नई नीति में आवासीय परिसरों में संचालित छोटे बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठानों के लिए स्पष्ट नियम तय करने की योजना है। मसौदा नीति के अनुसार ऐसे प्रतिष्ठानों में अधिकतम आठ कमरे और 16 बिस्तरों की अनुमति का प्रस्ताव रखा गया है। इन्हें स्वर्ण और रजत जैसी श्रेणियों में बांटने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। कमरों के आकार, स्वच्छता, सुविधाओं और सुरक्षा के आधार पर इनका वर्गीकरण किया जाएगा।

नई व्यवस्था में अतिथि सुरक्षा को विशेष महत्व दिया गया है। प्रस्तावित नियमों के तहत अतिथियों का अभिलेख रखना, पुलिस सत्यापन और विदेशी मेहमानों से जुड़े आवश्यक विवरण दर्ज करना जरूरी होगा। आग से बचाव के उपकरण, प्राथमिक उपचार की व्यवस्था, आपातकालीन संपर्क विवरण और सुरक्षित दरवाजों जैसे उपाय भी अनिवार्य किए जाने का प्रस्ताव है। प्रवेश और साझा क्षेत्रों में निगरानी कैमरों की व्यवस्था भी नियमों का हिस्सा हो सकती है।

सरकार का मानना है कि स्पष्ट नियम लागू होने से दिल्ली आने वाले घरेलू और विदेशी पर्यटकों को छोटे और सुरक्षित आवास विकल्प मिलेंगे। साथ ही, आवासीय संपत्तियों के मालिकों को भी कानूनी रूप से ऐसी सेवाएं संचालित करने का अवसर मिलेगा। हालांकि नई नीति लागू होने तक मौजूदा प्रतिष्ठानों की स्थिति और पंजीकरण प्रक्रिया को लेकर सरकार की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश महत्वपूर्ण होंगे।

दिल्ली में बेड एंड ब्रेकफास्ट व्यवस्था में यह बदलाव पर्यटन क्षेत्र के साथ-साथ भवन सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई नीति का अंतिम स्वरूप सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पुराने प्रतिष्ठानों, नए आवेदकों और आवासीय संपत्तियों पर नियमों का वास्तविक प्रभाव कितना पड़ेगा।

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