भारत ईरान के सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार में उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेज रहा है
भारत सरकार ने ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में भाग लेने के लिए एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय लिया है। इस निर्णय को भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल में विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन शामिल हैं, जो तेहरान में आयोजित अंतिम संस्कार समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस उच्चस्तरीय भागीदारी का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों, लोगों के बीच संपर्क तथा राजनीतिक और आर्थिक सहयोग के महत्व को रेखांकित करना है। भारत और ईरान ऊर्जा, व्यापार, क्षेत्रीय सुरक्षा तथा चाबहार बंदरगाह जैसे महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजनाओं में लंबे समय से सहयोग करते रहे हैं। ऐसे में भारत की ओर से अंतिम संस्कार में प्रतिनिधिमंडल भेजना दोनों देशों के रिश्तों की गंभीरता और परस्पर सम्मान को दर्शाता है।
ईरान में 4 जुलाई से शुरू हुए अंतिम संस्कार समारोह कई दिनों तक चलेंगे। तेहरान, क़ोम और अन्य प्रमुख शहरों में श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जा रहा है, जबकि अंतिम दफन उनके गृह नगर मशहद में निर्धारित है। समारोह में दुनिया के 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना जताई गई है, जिससे यह हाल के वर्षों के सबसे बड़े राजकीय अंतिम संस्कारों में से एक माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह कदम पश्चिम एशिया में संतुलित विदेश नीति बनाए रखने की उसकी रणनीति का हिस्सा है। भारत एक ओर ईरान के साथ अपने पारंपरिक संबंधों को मजबूत रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीतिक संवाद को भी बढ़ावा देने की नीति पर कायम है। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं, भारत की यह भागीदारी उसके संतुलित और व्यावहारिक कूटनीतिक दृष्टिकोण को भी दर्शाती है।




