भारत-जापान के बीच व्यापार और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर नई चर्चाएं तेज, निवेश और तकनीकी साझेदारी को मिलेगा बढ़ावा
भारत और जापान के बीच व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग को नई गति देने के उद्देश्य से दोनों देशों के अधिकारियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के बीच उच्चस्तरीय चर्चाएं तेज हो गई हैं। दोनों देश आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाने, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को सुदृढ़ करने, उन्नत प्रौद्योगिकी, हरित ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण और बुनियादी ढांचा विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, हाल की बैठकों में दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए कई संभावित परियोजनाओं और निवेश प्रस्तावों पर चर्चा की। जापानी कंपनियां भारत में विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग), ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहन, रेलवे, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल तकनीक के क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने में रुचि दिखा रही हैं। वहीं भारत भी जापानी निवेशकों के लिए बेहतर कारोबारी माहौल और आसान नीतिगत प्रक्रियाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम कर रहा है।
भारत और जापान के बीच पहले से ही विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी (Special Strategic and Global Partnership) मौजूद है। दोनों देश मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना, औद्योगिक कॉरिडोर, स्मार्ट सिटी, स्वच्छ ऊर्जा और कौशल विकास जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मिलकर कार्य कर रहे हैं। अब इन सहयोगों का दायरा और व्यापक बनाने पर विचार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में हो रहे बदलावों के बीच भारत जापानी कंपनियों के लिए एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है। इससे भारत में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, आधुनिक तकनीक का हस्तांतरण होगा और घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में भी वृद्धि होगी।
दोनों देशों ने मुक्त, सुरक्षित और नियम-आधारित आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई है। माना जा रहा है कि आगामी महीनों में कई नए निवेश समझौतों और औद्योगिक साझेदारियों की घोषणा हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-जापान सहयोग का विस्तार दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के साथ-साथ पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता और विकास को भी नई मजबूती प्रदान करेगा।




