उम्र 30 की, घुटने 60 के? युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है आस्टियोआर्थराइटिस, क्या हैं इसके कारण
नई दिल्ली। आस्टियोआर्थराइटिस (गठिया), जिसे लंबे समय से बुढ़ापे में होने वाली टूट-फूट की बीमारी माना जाता रहा है, अब 30 साल के युवाओं को भी तेजी से प्रभावित कर रहा है। इसका मुख्य कारण खराब जीवनशैली, गतिहीन दिनचर्या, मोटापा और वीकेंड वॉरियर (सप्ताह भर निष्क्रिय रहकर वीकेंड पर अचानक भारी वर्कआउट करना) फिटनेस कल्चर है।

यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय आर्थोपेडिक्स पत्रिका में प्रकाशित समीक्षा में दी गई है। समीक्षा में आस्टियोआर्थराइटिस को एक एकल बीमारी के बजाय एक विविध सिंड्रोम के रूप में पुनः परिभाषित किया गया है, जो विभिन्न जैविक, बायोमैकेनिकल, मेटाबॉलिक, आनुवंशिक और आणविक तंत्रों द्वारा संचालित है।
बीमारी के अलग-अलग कारण
15 मई को प्रकाशित एक समीक्षा में आस्टियोआर्थराइटिस को एक ही बीमारी के बजाय कई तरह के बायोलॉजिकल, बायोमैकेनिकल, मेटाबॉलिक, जेनेटिक और मालिक्यूलर कारणों से होने वाला एक मिला-जुला सिंड्रोम बताया गया है। शोध से पता चलता है कि इलाज का पारंपरिक “सबके लिए एक जैसा” तरीका अक्सर इसलिए काम नहीं करता क्योंकि मरीजों में बीमारी के अलग-अलग कारण होते हैं।




