पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार चौथी बढ़ोतरी, आम जनता पर बढ़ा बोझ
देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार चौथी बार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। तेल कंपनियों द्वारा जारी नए रेट के अनुसार दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई समेत कई बड़े शहरों में ईंधन की कीमतें फिर बढ़ गई हैं। लगातार हो रही इस वृद्धि का असर आम आदमी के बजट के साथ-साथ परिवहन और रोजमर्रा की जरूरतों पर भी दिखाई देने लगा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी इसकी मुख्य वजह मानी जा रही है। तेल कंपनियों का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों और आयात लागत बढ़ने के कारण घरेलू बाजार में कीमतों को समायोजित करना जरूरी हो गया है। हालांकि विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है और महंगाई पर चिंता जताई है।
ईंधन की कीमतें बढ़ने से माल ढुलाई और परिवहन खर्च में भी इजाफा होने की संभावना है। इसका असर सब्जियों, खाद्यान्न और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। कई शहरों में टैक्सी और ऑटो यूनियनों ने किराया बढ़ाने की मांग भी उठानी शुरू कर दी है। वहीं आम लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच पेट्रोल-डीजल के दामों में इजाफा उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बनता जा रहा है।
सरकार की ओर से फिलहाल कीमतों में राहत को लेकर कोई बड़ा ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम स्थिर होते हैं तो आने वाले समय में राहत मिल सकती है। फिलहाल देशभर में लोग ईंधन की बढ़ती कीमतों के असर को महसूस कर रहे हैं और बाजार पर इसकी सीधी छाप दिखाई दे रही है।




