पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी, आम लोगों पर बढ़ा महंगाई का दबाव

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार बढ़ोतरी किए जाने से आम जनता की चिंता बढ़ गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में लगभग 90 पैसे प्रति लीटर तक की वृद्धि की घोषणा की है। नई दरें लागू होने के बाद दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई समेत कई बड़े शहरों में ईंधन की कीमतें फिर बढ़ गई हैं। इस फैसले का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ने लगा है।

तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी के कारण यह कदम उठाना पड़ा। पिछले कुछ दिनों से ब्रेंट क्रूड के दाम लगातार ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं, जिससे भारत जैसी तेल आयात करने वाली अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कारण आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत में वृद्धि होना तय माना जा रहा है। इसका असर सब्जियों, खाद्यान्न, दूध और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर से जुड़े लोगों ने कहा है कि यदि कीमतों में लगातार वृद्धि जारी रही, तो किराए और माल ढुलाई शुल्क बढ़ाना पड़ सकता है।

विपक्षी दलों ने भी इस बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है और टैक्स में राहत देने की मांग की है। वहीं, आम लोगों का कहना है कि पहले से बढ़ती महंगाई के बीच ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी ने घरेलू बजट को और प्रभावित किया है।

आर्थिक जानकारों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं हुईं, तो आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है, जिसका असर देश की आर्थिक गतिविधियों पर भी दिखाई देगा।

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