एजुकेट गर्ल्स की संस्थापक सफीना हुसैन ‘टाइम वुमन ऑफ द ईयर 2026’ सूची में शामिल
“एजुकेट गर्ल्स” की संस्थापक **सफीना हुसैन** को ‘टाइम वुमन ऑफ द ईयर 2026’ की प्रतिष्ठित सूची में शामिल किया गया है। यह सम्मान वैश्विक स्तर पर बदलाव लाने और लैंगिक समानता के लिए काम करने वाली महिलाओं को दिया जाता है।
सफीना हुसैन 16 वैश्विक सम्मानित महिलाओं में से एक हैं। इस सूची में अभिनेत्री टियाना टेलर, ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट एथलीट सिडनी मैक्लॉघलिन, अभिनेत्री व निर्माता लूसी लियू और अभिनेत्री-गायिका शर्ली ली राल्फ जैसी हस्तियाँ भी शामिल हैं। यह सम्मान सफीना हुसैन के उस मिशन को वैश्विक पहचान देता है, जो शिक्षा में लैंगिक अंतर को कम करने के लिए समर्पित है।
सफीना हुसैन ने वर्ष 2007 में ‘एजुकेट गर्ल्स’ की स्थापना की, ताकि भारत के ग्रामीण, दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों में पढ़ाई से दूर रहने वाली लड़कियों की समस्या का समाधान किया जा सके। राजस्थान के कुछ गाँवों से शुरू हुआ यह अभियान अब 12 राज्यों के 30,000 से अधिक गाँवों तक पहुँच चुका है और लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने वाले सबसे बड़े समुदाय-आधारित प्रयासों में से एक बन गया है।
टाइम को दिए इंटरव्यू में सफीना हुसैन ने कहा, “पहले दिन से लेकर आज तक हमारा ध्यान केवल उन लड़कियों पर रहा है, जो पढ़ाई से दूर हैं, क्योंकि यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव भी रहा है। मुझे पता है कि पीछे रह जाने का अहसास कैसा होता है।”
यह सम्मान संस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के बाद आया है। वर्ष 2025 में ‘एजुकेट गर्ल्स’ को प्रतिष्ठित रमन मैगसेसे पुरस्कार (एशिया का नोबेल पुरस्कार) मिला था। साथ ही संस्था ने टीईडी ऑडिशियस प्रोजेक्ट का लक्ष्य पूरा करते हुए 20 लाख से अधिक पढ़ाई से दूर रहने वाली लड़कियों को फिर से शिक्षा से जोड़ा।
सफीना हुसैन ‘एवरी लास्ट गर्ल: अ जर्नी टू एजुकेट इंडियाज़ फॉरगॉटन डॉटर्स’ नामक पुस्तक की लेखिका भी हैं, जो जनवरी 2026 में प्रकाशित हुई। इस पुस्तक में उन्होंने अपने व्यक्तिगत सफर को भारत के वंचित समुदायों की लड़कियों की वास्तविक कहानियों के साथ जोड़ा है और उन बाधाओं व समाधानों का उल्लेख किया है, जो उन्हें दोबारा शिक्षा से जोड़ने में सहायक बने।
सम्मान पर प्रतिक्रिया देते हुए सफीना हुसैन ने कहा, “यह सम्मान भारत में लड़कियों की शिक्षा के आंदोलन पर वैश्विक ध्यान आकर्षित करता है और हमारी लड़कियों के साहस, धैर्य और आत्मनिर्भर बनने के संकल्प को उजागर करता है। हमारा लक्ष्य 2035 तक एक करोड़ और लड़कियों तक पहुँचना और हर लड़की को आवाज, विकल्प और आत्मनिर्भरता दिलाना है।”
एजुकेट गर्ल्स की सीईओ गायत्री नायर लोबो ने कहा, “यह सम्मान सरकार और स्थानीय समुदायों के साथ साझेदारी की ताकत को दर्शाता है। हमें गर्व है कि ग्रामीण भारत की 20 लाख से अधिक लड़कियों को शिक्षा में वापस लाने के हमारे प्रयासों को टाइम के वैश्विक मंच पर पहचान मिली है।”
सफीना हुसैन और ‘एजुकेट गर्ल्स’ को मिली यह उपलब्धि लड़कियों को शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाने के उनके मिशन का एक नया पड़ाव है। टाइम के अनुसार, ‘वुमन ऑफ द ईयर 2026’ सूची में वे महिलाएँ शामिल हैं, जो महिलाओं और लड़कियों के सामने आने वाली गंभीर चुनौतियों पर प्रभावी काम कर रही हैं। टाइम 10 मार्च को लॉस एंजेलेस में आयोजित ‘वुमन ऑफ द ईयर लीडरशिप फोरम’ और ‘वुमन ऑफ द ईयर गाला’ में इस सम्मान का औपचारिक जश्न मनाएगा।
**एजुकेट गर्ल्स के बारे में:**
‘एजुकेट गर्ल्स’ एक भारतीय गैर-लाभकारी संस्था है, जो राज्य सरकारों और समुदायों के साथ मिलकर ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देती है। 2007 से अब तक राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार में 55,000 से अधिक स्वयंसेवकों के नेटवर्क के माध्यम से संस्था ने 20 लाख से अधिक लड़कियों को स्कूल में नामांकन दिलाया और 24 लाख से अधिक लड़कियों की पढ़ाई में सुधार किया है। संस्था का लक्ष्य 2035 तक एक करोड़ विद्यार्थियों को सशक्त बनाना है।




