विविधता में एकता ही भारत की शक्ति : Vice President C. P. Radhakrishnan

नयी दिल्ली : उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि भारत ने प्राचीन काल से ही विविध आस्थाओं , दर्शनों तथा संस्कृतियों का स्वागत किया है और विविधता में एकता उसकी शक्ति रही है। श्री राधाकृष्णन ने बुधावार को यहां श्री गुरु तेग बहादुर के 350वें शहादत दिवस की स्मृति में आयोजित एक अंतरधार्मिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए इस कार्यक्रम को शांति, मानवाधिकारों और धार्मिक सद्भाव के लिए एक वैश्विक आह्वान बताया। उपराष्ट्रपति ने श्री गुरु तेग बहादुर को नैतिक साहस का प्रकाशस्तंभ बताते हुए कहा कि उनका जीवन और बलिदान सम्पूर्ण मानवता की धरोहर है।

श्री राधाकृष्णन ने गुरु तेग बहादुर की शहादत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह इतिहास में धार्मिक स्वतंत्रता की सबसे असाधारण पुष्टि में से एक है। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर ने अपना जीवन न तो राजनीतिक सत्ता के लिए और न ही किसी एक मत की श्रेष्ठता के लिए बलिदान किया, बल्कि लोगों को अपने अंतःकरण के अनुसार जीने और उपासना करने के अधिकार की रक्षा के लिए दिया। अत्यधिक असहिष्णुता के समय में वह पीड़ितों के लिए ढाल बनकर खड़े हुए।
उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर ने दुनिया को सिखाया कि करुणा से प्रेरित साहस समाजों को रूपांतरित कर सकता है, और अन्याय के सामने मौन रहना सच्चे धर्म के अनुकूल नहीं है। इन्हीं स्थायी मूल्यों के कारण गुरु तेग बहादुर न केवल एक सिख गुरु के रूप में, बल्कि सर्वोच्च बलिदान और नैतिक साहस के सार्वभौमिक प्रतीक के रूप में पूजनीय हैं और उन्हें ‘हिंद दी चादर’ की उपाधि से सम्मानित किया गया है।
उपराष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि भारत की शक्ति सदैव उसकी विविधता में एकता रही है। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से ही भारत ने विविध आस्थाओं, दर्शनों और संस्कृतियों का स्वागत किया है, और इसी भावना को संविधान निर्माताओं ने विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, आस्था और उपासना की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने वाले मौलिक अधिकारों के माध्यम से सुदृढ़ किया।
समकालीन वैश्विक चुनौतियों का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में भारत ने सफलतापूर्वक जी 20 की अध्यक्षता की और उपनिषदों के दर्शन “वसुधैव कुटुम्बकम्” को “वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर” की वैश्विक थीम में रूपांतरित किया। उन्होंने कहा कि आज भारत मिशन लाइफ के माध्यम से जलवायु परिवर्तन जैसी जटिल वैश्विक चुनौतियों के समाधान प्रस्तुत कर रहा है और कोविड-19 महामारी के दौरान “वैक्सीन मैत्री” पहल के तहत 100 से अधिक देशों को निःशुल्क टीके उपलब्ध कराकर अपनी मानवीय भूमिका निभाई।
यह अंतरधार्मिक सम्मेलन राज्यसभा सांसद और ग्लोबल इंटरफेथ हार्मनी फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी द्वारा आयोजित किया गया था। सम्मेलन में जैन आचार्य लोकेश मुनि, नामधारी सतगुरु उदय सिंह, मोहन रूपा दास (अध्यक्ष, इस्कॉन मंदिर, दिल्ली), अजमेर दरगाह शरीफ के हाजी सैयद सलमान चिश्ती, रेव. फादर मोनोडीप डैनियल (उपाध्यक्ष, डायोसिस ऑफ दिल्ली) तथा सरदार तरलोचन सिंह (पूर्व अध्यक्ष, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग) सहित अनेक प्रतिष्ठित धार्मिक एवं आध्यात्मिक नेता उपस्थित थे।

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