सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर Rahul Gandhi के आरोपों की खुली पोल, सरकार से अनुशंसित 8 नामों में से पांच वंचित वर्गों वर्ग से

नई दिल्ली: नेता विपक्ष Rahul Gandhi सरकार के सुझावों को जांच परखे बिना ही खारिज कर देते है इसका साक्ष्य सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर हुई बैठक से मिलने लगा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह व राहुल गांधी की मौजूदगी में एक दिन पहले ही सूचना आयुक्तों और सर्तकता आयुक्त का चयन होना था। इस बैठक में राहुल ने सरकार की ओर से अनुशंसित सभी नामों पर आपत्ति जताई और बाहर आ गए।

उनका आरोप था कि सभी पदों के लिए जो नाम शार्टलिस्ट किए गए थे उसमें सिर्फ एक वंचित वर्ग से थे। पर जो तथ्य बाहर आ रहे हैं वह बिल्कुल उलट हैं। सरकार की ओर से अनुशंसित आठ नामों में से पांच वंचित वर्गों से ही हैं। सरकार की ओर से जो आठ नाम अनुशंसा किए गए थे उनमें से एक एक एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक और महिला के नाम थे।

बताया जाता है कि ये सारे नाम अब राष्ट्रपति के अनुमोदन के लिए भेज दिया गया है। यानी जो नई नियुक्तियां होंगी उनमें वंचित वर्ग का प्रतिनिधित्व लगभग 65 फीसद दिखेगा। ऐसे में नाम सार्वजनिक होने के बाद राहुल के लिए असहज स्थिति हो सकती है क्योंकि बैठक में उन्होंने वंचित वर्ग से आने वाले इन नामों का भी विरोध किया था।

सरकारी सूत्रों के अनुसार 2005 से 2014 तक, यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान एससी-एसटी समुदाय से एक भी व्यक्ति को आयोग के सदस्य या अध्यक्ष के रूप में नियुक्त नहीं किया गया था।

 

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