दिल्ली में प्रदूषण बढ़ा, आईटीओ का वायु गुणवत्ता सूचकांक 430 तक पहुंचा
दिल्ली में दिवाली से पहले वायु प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ गई है। राजधानी के आईटीओ क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 430 तक पहुंचने की खबर है। यह स्तर गंभीर श्रेणी में आता है। प्रदूषण बढ़ने से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।
वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 से ऊपर होने पर हवा को गंभीर श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे वातावरण में स्वस्थ लोगों को भी सांस लेने में परेशानी हो सकती है। आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी और सांस फूलने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। हालांकि, आईटीओ में दर्ज बताए गए आंकड़े की तारीख और समय की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है, क्योंकि प्रदूषण का स्तर दिनभर बदलता रहता है।
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के पीछे वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और मौसम की परिस्थितियां प्रमुख कारण हो सकते हैं। हवा की गति कम होने पर प्रदूषक कण वातावरण में जमा हो जाते हैं। दिवाली के दौरान पटाखों का धुआं भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।
प्रदूषण से बचाव के लिए लोगों को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक बाहर रहने से बचना चाहिए। वायु गुणवत्ता बेहद खराब होने पर खुले स्थानों में दौड़ने और कठिन व्यायाम करने से परहेज करना उचित है। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। सांस लेने में परेशानी होने पर चिकित्सक से सलाह लें।
प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए संबंधित एजेंसियों को सड़कों की धूल कम करने, निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन कराने और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन की निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। नागरिक भी सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करके और कचरा खुले में न जलाकर योगदान दे सकते हैं।




