देश में मानसून की बारिश सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम, कृषि पर असर की चिंता
भारत में वर्ष 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम वर्षा के साथ समाप्त हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, जून से सितंबर के बीच देश में लगभग 759.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि इस अवधि का दीर्घकालिक औसत करीब 868.6 मिलीमीटर है। यह वर्ष 2001 के बाद देश का चौथा सबसे कमजोर मानसून रहा।
मानसून की कमी का असर देश के अलग-अलग हिस्सों में समान नहीं रहा। पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत तथा दक्षिण प्रायद्वीपीय क्षेत्र के कई हिस्सों में वर्षा की कमी अधिक रही, जबकि मध्य भारत में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही। पंजाब, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय जैसे क्षेत्रों में पूरे मानसून मौसम के दौरान वर्षा की कमी दर्ज की गई।
कम बारिश का सबसे महत्वपूर्ण असर कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है। मानसून की वर्षा मिट्टी में नमी बनाए रखने और खरीफ फसलों के लिए महत्वपूर्ण होती है। अब रबी फसलों की बुवाई का समय शुरू हो रहा है, इसलिए जिन क्षेत्रों में मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं है, वहां किसानों को सिंचाई पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है। विशेषज्ञों ने भी कम मिट्टी की नमी और कमजोर वर्षा के कारण रबी फसलों को लेकर चिंता जताई है।
कम वर्षा का प्रभाव जलाशयों, पेयजल उपलब्धता और जलविद्युत उत्पादन पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा कृषि उत्पादन में कमी आने पर कुछ फसलों की कीमतों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ने की संभावना रहती है।
मौसम विभाग के अनुसार, वर्ष 2026 में अल नीनो की स्थिति भी मजबूत हुई है, जिसने मानसूनी परिस्थितियों को प्रभावित किया। अक्टूबर में भी देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा का अनुमान जताया गया है।




