दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों से पहले वायु प्रदूषण नियंत्रण की तैयारी तेज
नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण बढ़ने की आशंका को देखते हुए केंद्र और क्षेत्रीय प्रशासन ने पहले से तैयारियां तेज कर दी हैं। सितंबर की शुरुआत में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत एनसीआर राज्यों की प्रदूषण नियंत्रण योजनाओं की समीक्षा की। इसमें प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर समयबद्ध कार्रवाई, निगरानी और आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने सड़क की धूल, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन, निर्माण गतिविधियों, औद्योगिक प्रदूषण, कचरा जलाने और पराली जैसे स्रोतों पर नियंत्रण के लिए अलग-अलग उपाय तय किए हैं। जून में हुई समीक्षा के दौरान दिल्ली-एनसीआर में सड़कों की धूल कम करने के लिए अतिरिक्त यांत्रिक सफाई मशीनों की तैनाती और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया था।
वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए एक अक्टूबर 2026 से एनसीआर में वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के बिना वाहनों में ईंधन नहीं भरने की व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। इसके लिए ईंधन केंद्रों पर स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली सहित तकनीकी व्यवस्था विकसित की जा रही है।
पराली जलाने की घटनाओं पर निगरानी भी सर्दियों की तैयारी का अहम हिस्सा है। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में फसल अवशेष प्रबंधन तथा पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए राज्यवार कार्ययोजनाओं पर काम किया जा रहा है। पंजाब और हरियाणा में वास्तविक समय पर खेतों में आग की निगरानी के लिए ड्रोन के इस्तेमाल की तैयारी भी की जा रही है।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए औद्योगिक इकाइयों, निर्माण स्थलों और डीजल जनरेटरों की जांच भी जारी है। अगस्त में सीएक्यूएम की जांच टीमों ने एनसीआर में कई स्थानों का निरीक्षण किया और नियमों का पालन नहीं करने वाली इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित की।
प्रशासन का जोर इस बार सर्दी शुरू होने से पहले तैयारियां पूरी करने पर है, ताकि वायु गुणवत्ता बिगड़ने की स्थिति में तत्काल प्रभावी कदम उठाए जा सकें। साथ ही नागरिकों और स्थानीय निकायों को प्रदूषण नियंत्रण अभियान में शामिल करने पर भी जोर दिया जा रहा है।




