भारत-वियतनाम रक्षा संबंध मजबूत करने पर सहमति, सैन्य उपकरणों के सह-उत्पादन पर जोर
नई दिल्ली। भारत और वियतनाम ने रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई है। दोनों देशों के बीच हालिया उच्चस्तरीय बातचीत में रक्षा उद्योग, समुद्री सुरक्षा, प्रौद्योगिकी साझेदारी और सैन्य उपकरणों के सह-उत्पादन जैसे विषयों पर चर्चा हुई। 14 सितंबर को नई दिल्ली में हुई 19वीं भारत-वियतनाम संयुक्त आयोग बैठक में दोनों पक्षों ने भारतीय रक्षा सामग्री के सह-उत्पादन के जरिए सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में सहमति जताई।
भारत और वियतनाम के बीच रक्षा संबंध पहले से ही प्रशिक्षण, सैन्य आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और समुद्री सहयोग जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं। दोनों देशों ने रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ संयुक्त अनुसंधान, नई तकनीकों के विकास और सह-उत्पादन को भी महत्वपूर्ण क्षेत्र माना है। मई 2026 में हुई भारत-वियतनाम रक्षा वार्ता में भी रक्षा उद्योग, समुद्री सुरक्षा और संयुक्त अनुसंधान एवं उत्पादन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
रक्षा सहयोग के साथ दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नौवहन की स्वतंत्रता के महत्व पर भी जोर देते रहे हैं। सितंबर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा उपमंत्री वरिष्ठ लेफ्टिनेंट जनरल गुयेन ट्रुओंग थांग के बीच हुई बैठक में संयुक्त पहलों, तकनीकी साझेदारी और रक्षा औद्योगिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने समुद्री और रक्षा संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत के लिए वियतनाम दक्षिण-पूर्व एशिया में महत्वपूर्ण साझेदार है और दोनों देशों के संबंध भारत की पूर्वोन्मुख नीति के तहत लगातार विस्तार कर रहे हैं। रक्षा क्षेत्र के अलावा दोनों देशों ने व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और संपर्क व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की है।
दोनों देशों के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग भविष्य में संयुक्त उत्पादन और तकनीकी साझेदारी के नए अवसर खोल सकता है। साथ ही, दोनों पक्ष क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं।




