दिल्ली-एनसीआर में बढ़ा स्वाइन फ्लू का खतरा, उमस भरे मौसम में एच1एन1 के मामले बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग सतर्क
दिल्ली-एनसीआर में मानसून के बीच उमस और मौसम में लगातार बदलाव के कारण एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में बढ़ोतरी ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। इसके साथ ही अन्य श्वसन संक्रमणों के मरीज भी अस्पतालों की बाह्य रोगी सेवाओं में पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार इस मौसम में बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, शरीर में दर्द और अत्यधिक थकान जैसी शिकायतों वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है।
दिल्ली में इस वर्ष एच1एन1 के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार 12 अगस्त तक दिल्ली में 1,449 मामले सामने आ चुके थे। पिछले वर्ष की तुलना में यह संख्या काफी अधिक बताई जा रही है। कुछ मरीजों में संक्रमण गंभीर होने पर सांस लेने में परेशानी और रक्त में ऑक्सीजन का स्तर गिरने जैसी स्थिति भी सामने आई है।
चिकित्सकों का कहना है कि मानसून के दौरान वातावरण में अधिक नमी, तापमान में उतार-चढ़ाव और भीड़भाड़ वाली जगहों पर लोगों का संपर्क बढ़ने से मौसमी श्वसन संक्रमण तेजी से फैल सकते हैं। अस्पतालों में फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण चिकित्सक लोगों को लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दे रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से सांस या अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। लगातार तेज बुखार, सांस लेने में कठिनाई, सीने में परेशानी या लक्षणों के लगातार बिगड़ने की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से हाथों की नियमित सफाई, खांसते और छींकते समय मुंह ढकने तथा बीमार होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है। दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग की जानकारी के अनुसार बुखार, खांसी, नाक बहना, गले में खराश और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिए।
चिकित्सकों ने स्पष्ट किया है कि घबराने के बजाय सावधानी बरतना जरूरी है। समय पर चिकित्सकीय जांच और उचित उपचार से संक्रमण को गंभीर होने से रोका जा सकता है।




