प्रधानमंत्री का अगले सप्ताह इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड दौरा, रणनीतिक और आर्थिक सहयोग पर रहेगा फोकस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड की बहु-देशीय आधिकारिक यात्रा पर रवाना होंगे। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत के इन तीनों देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना, आर्थिक सहयोग का विस्तार करना तथा हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देना है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री विभिन्न देशों के शीर्ष नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।
इंडोनेशिया दौरे के दौरान समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी प्रमुख एजेंडा रहेगा। दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त और सुरक्षित समुद्री मार्ग सुनिश्चित करने के लिए सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा करेंगे। इसके अलावा, आसियान देशों के साथ भारत के संबंधों को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
ऑस्ट्रेलिया में प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान रक्षा, शिक्षा, खनिज संसाधन, स्वच्छ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी। दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण खनिजों, हरित ऊर्जा परियोजनाओं और निवेश बढ़ाने के लिए नए समझौतों की उम्मीद जताई जा रही है। साथ ही, आतंकवाद विरोधी सहयोग और समुद्री सुरक्षा को लेकर भी साझा रणनीति पर विचार किया जाएगा।
यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री न्यूज़ीलैंड पहुंचेंगे, जहां वे वहां के प्रधानमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान कृषि, डेयरी, शिक्षा, पर्यटन, नवाचार, व्यापार और भारतीय समुदाय से जुड़े विषयों पर विशेष चर्चा होने की संभावना है। भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को आगे बढ़ाने पर भी बातचीत हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत की “एक्ट ईस्ट” और इंडो-पैसिफिक नीति को नई गति देगा। वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच यह यात्रा भारत की कूटनीतिक सक्रियता, आर्थिक हितों की रक्षा और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग और तकनीकी साझेदारी के नए अवसर खुलने की उम्मीद है, जो आने वाले वर्षों में भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को और मजबूत बनाएंगे।




